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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम अबू दाऊद : 4226

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ قَالَ قَرَأْتُ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نَافِعٍ قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ عَنْ ابْنِ أَخِي جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَجَالِسُ بِالْأَمَانَةِ إِلَّا ثَلَاثَةَ مَجَالِسَ سَفْكُ دَمٍ حَرَامٍ أَوْ فَرْجٌ حَرَامٌ أَوْ اقْتِطَاعُ مَالٍ بِغَيْرِ حَقٍّ

हमें बताया है [अहमद बिन सलीह] उन्होंने कहा; मैंने इसे [अब्दुल्ला बिन नफी] के सामने पढ़ा, उन्होंने कहा; मुझे [इब्न अबू ज़िब] ने [इब्न अखी जाबिर बिन अब्दुल्ला] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] से बताया है, उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक आदमी को सभा में भरोसेमंद होना चाहिए, सिवाय तीन सभाओं के; हराम खून से मारना, हराम गुप्तांग (ज़िना) और बिना हक के जायदाद लेना।"