Imam Abu Dawud : 3855
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ الْقَعْنَبِيُّ عَنْ مَالِكٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَزَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ أَنَّهُمَا أَخْبَرَاهُأَنَّ رَجُلَيْنِ اخْتَصَمَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَحَدُهُمَا يَا رَسُولَ اللَّهِ اقْضِ بَيْنَنَا بِكِتَابِ اللَّهِ وَقَالَ الْآخَرُ وَكَانَ أَفْقَهَهُمَا أَجَلْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَاقْضِ بَيْنَنَا بِكِتَابِ اللَّهِ وَأْذَنْ لِي أَنْ أَتَكَلَّمَ قَالَ تَكَلَّمْ قَالَ إِنَّ ابْنِي كَانَ عَسِيفًا عَلَى هَذَا وَالْعَسِيفُ الْأَجِيرُ فَزَنَى بِامْرَأَتِهِ فَأَخْبَرُونِي أَنَّ عَلَى ابْنِي الرَّجْمَ فَافْتَدَيْتُ مِنْهُ بِمِائَةِ شَاةٍ وَبِجَارِيَةٍ لِي ثُمَّ إِنِّي سَأَلْتُ أَهْلَ الْعِلْمِ فَأَخْبَرُونِي أَنَّ عَلَى ابْنِي جَلْدَ مِائَةٍ وَتَغْرِيبَ عَامٍ وَإِنَّمَا الرَّجْمُ عَلَى امْرَأَتِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَأَقْضِيَنَّ بَيْنَكُمَا بِكِتَابِ اللَّهِ أَمَّا غَنَمُكَ وَجَارِيَتُكَ فَرَدٌّ إِلَيْكَ وَجَلَدَ ابْنَهُ مِائَةً وَغَرَّبَهُ عَامًا وَأَمَرَ أُنَيْسًا الْأَسْلَمِيَّ أَنْ يَأْتِيَ امْرَأَةَ الْآخَرِ فَإِنْ اعْتَرَفَتْ رَجَمَهَا فَاعْتَرَفَتْ فَرَجَمَهَا
हम [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह अल कानाबी] से [मलिक] से [इब्न शिहाब] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उत्बाह बिन मसूद] से [अबू हुरैरा] अऊर [जैद बिन खालिद अल जुहानी] से कहिन है कि ओन दुइनौ ने ओनका सूचित किहिन कि दुई मनई रहें जेके बीच विवाद रहा अऊर उ रसूलुल्लाह अलैह अलैह से शिकायत किहिन। उनमें से एक ने कहा, 'हे अल्लाह के रसूल, हमका अल्लाह के किताब के अनुसार फैसला दे। फिर दूसरा - अऊर उ दुइनौ मा से ज्यादा जानकार रहा - बोला, 'हाँ, हे अल्लाह के रसूल, हमका अल्लाह के किताब के अनुसार फैसला दइ द्या। अऊर मोका बात करै का मौका दइ द्या'। उ कहिन: 'बोलौ'। मनसवा तब कहिस कि मोर लड़का या मड़ई के लगे काम करत रहै, तबै मोर लड़का आपन मेहरिया के साथै व्यभिचार करिस हवै। तब लोग मोसे कहिन कि मोर बेटवा का पत्थरबाजी करै का है, तौ मैं ओका सौ भेड़ अऊर एक गुलामी से फिरौती दिहेंव जउन मोर रहै। यहिके बाद हम विशेषज्ञन से पूछेन, तौ उइ बताइन कि मोर बेटवा का सौ बार मार के एक साल खातिर निर्वासित कीन जाय, जबकि औरत का पत्थरबाजी कीन जाय'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'उनके हाथ मा मोर आत्मा है, मैं तोहका अल्लाह के किताब के अनुसार फैसला देब। तोहार बकरी अउर नौकरानी तोहरे लगे लौटाइ दीन जइहीं'। फिर उ मनई के बेटवा का कोड़ा मारिस अऊर एक साल के लिए निर्वासित कइ दिहिस। फिर उनइस अल असलमी का आदेश दिहिन कि उ औरत का लावै, अगर उ स्वीकार करत है कि ओका पत्थरबाजी कीन जई, तौ औरत स्वीकार किहिस अऊर अंत मा पत्थर मार दीन गा।