Nabi pernah meruqyah dirinya sendiri dan keluarga dengan mu‘awwidzatain
Imam Abu Dawud : 3403
حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ عَنْ مَالِكٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا اشْتَكَى يَقْرَأُ فِي نَفْسِهِ بِالْمُعَوِّذَاتِ وَيَنْفُثُ فَلَمَّا اشْتَدَّ وَجَعُهُ كُنْتُ أَقْرَأُ عَلَيْهِ وَأَمْسَحُ عَلَيْهِ بِيَدِهِ رَجَاءَ بَرَكَتِهَا
हमका [अल का'नाबी] से [मलिक] से [इब्न शिहाब] से ['उर्वाह] से [ऐस्याह] पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पत्नी से बतावा गा है कि जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम बीमार रहे, तौ उ मुअवविदात पत्र पढ़िन - रक्षा के लिए - अऊर ओनके ऊपर फूंक मारिन। जब ओकर दर्द अउर बढ़ि गा, तौ हम ओका पढ़ि के ओकर हाथ रगड़ित, ओकर आशीर्वाद पावै के उम्मीद मा'।