Imam Abu Dawud : 2287
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ يَعْنِي ابْنَ سَعْدٍ أَخْبَرَنَا ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ جَارِيَةَ الثَّقَفِيُّ حَلِيفُ بَنِي زُهْرَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَشَرَةً عَيْنًا وَأَمَّرَ عَلَيْهِمْ عَاصِمَ بْنَ ثَابِتٍ فَنَفَرُوا لَهُمْ هُذَيْلٌ بِقَرِيبٍ مِنْ مِائَةِ رَجُلٍ رَامٍ فَلَمَّا أَحَسَّ بِهِمْ عَاصِمٌ لَجَئُوا إِلَى قَرْدَدٍ فَقَالُوا لَهُمْ انْزِلُوا فَأَعْطُوا بِأَيْدِيكُمْ وَلَكُمْ الْعَهْدُ وَالْمِيثَاقُ أَنْ لَا نَقْتُلَ مِنْكُمْ أَحَدًا فَقَالَ عَاصِمٌ أَمَّا أَنَا فَلَا أَنْزِلُ فِي ذِمَّةِ كَافِرٍ فَرَمَوْهُمْ بِالنَّبْلِ فَقَتَلُوا عَاصِمًا فِي سَبْعَةِ نَفَرٍ وَنَزَلَ إِلَيْهِمْ ثَلَاثَةُ نَفَرٍ عَلَى الْعَهْدِ وَالْمِيثَاقِ مِنْهُمْ خُبَيْبٌ وَزَيْدُ بْنُ الدَّثِنَةِ وَرَجُلٌ آخَرُ فَلَمَّا اسْتَمْكَنُوا مِنْهُمْ أَطْلَقُوا أَوْتَارَ قِسِيِّهِمْ فَرَبَطُوهُمْ بِهَا فَقَالَ الرَّجُلُ الثَّالِثُ هَذَا أَوَّلُ الْغَدْرِ وَاللَّهِ لَا أَصْحَبُكُمْ إِنَّ لِي بِهَؤُلَاءِ لَأُسْوَةً فَجَرُّوهُ فَأَبَى أَنْ يَصْحَبَهُمْ فَقَتَلُوهُ فَلَبِثَ خُبَيْبٌ أَسِيرًا حَتَّى أَجْمَعُوا قَتْلَهُ فَاسْتَعَارَ مُوسَى يَسْتَحِدُّ بِهَا فَلَمَّا خَرَجُوا بِهِ لِيَقْتُلُوهُ قَالَ لَهُمْ خُبَيْبٌ دَعُونِي أَرْكَعُ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ قَالَ وَاللَّهِ لَوْلَا أَنْ تَحْسَبُوا مَا بِي جَزَعًا لَزِدْتُحَدَّثَنَا ابْنُ عَوْفٍ حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ أَبِي سُفْيَانَ بْنِ أَسِيدِ بْنِ جَارِيَةَ الثَّقَفِيُّ وَهُوَ حَلِيفٌ لِبَنِي زُهْرَةَ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ أَبِي هُرَيْرَةَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ
हमसे कहिस है [मूसा बिन इस्माइल] हमसे कहिस है [इब्राहिम बिन साद], हमसे कहिस है [इब्न शिहाब] हमसे कहिस है ['अमर बिन जरीया अत्स त्साकाफी], बानी जुहरा के एक सहयोगी, [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वसलम से, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दस जासूस भेजिन अऊर अशिम बिन थाबित का नेता नियुक्त किहिन। तब हुजैल के लोग ओनसे लड़ै खातिर निकरिन, जेहिमा लगभग सौ तीरंदाज रहे। फिर जब आशिम का हुडजैल लोगन के आगमन का अहसास भवा, तौ उइ ऊँचाई वाले इलाकन मा शरण लिहिन। तब हुडजैल लोग कहिन; नीचे आवा अउर मोका आपन हाथ दइ द्या।” हम वादा करत हई कि हम आप सब मा से केहू का न मारिब। तब आशिम कहिन; जहाँ तक मोर बात है, मैं अविश्वासियन के रक्षा मा नाहीं जाब। फिर ओनका गोली मारिन अऊर मारे गए सात लोगन मा आशिम का मार डारिन। अऊर तीन मनई समझौता लइके ओनके पास उतरे। तीनौ मनई मा खुबैब, जैद बिन अद दतसानाह, अउर केहू रहा। फिर जब लोग ओनका नियंत्रित किहिन, तौ उइ आपन धनुष के तार छोड़िन अऊर तीनौ मनई का बांध दिहिन। तीसरा मनई कहिस; ई एक टूटे वादा के शुरुआत है। अल्लाह के कसम, मैं तोहरे साथ नाहीं रहब, वाकई उ लोग मोर आदर्श हैं। फिर उइ ओका पकड़ लिहिन लेकिन उ ओनके पीछे जाय से मना कइ दिहिस। तब उइ ओका मार डारिन। अऊर खुबैब तब तक कैदी रहा जब तक कि उइ ओका मारे के लिए राजी नाइ होइ गें। फिर उ आपन जघन के बाल मुंडवावै के लिए एक चाकू उधार लिहिन। फिर जब उइ ओका मारय के लिए ले जाय के लिए बाहर आए तो खूबैब ओनसे कहिन; मोका दुइ रकात के नमाज पढ़ै के अनुमति दइ द्या! तब उ कहिन; अल्लाह कसम अगर तुम न सोचते कि मैं डर रहा हूँ तो बढ़ा देते हमसे [इब्न औफ] बताइस है, हमसे [अबू अल यामन] कहिस है, हमसे [स्यूअैब] [अज जुहरी] से कहिस है, हमसे [अमर बिन सुफयान बिन असिद बिन जरीया अत्स त्साकाफी] कहिस है कि उ बनू जुहरा के सहयोगी रहे, अऊर उ अबू हुरै के दोस्तन में से एक रहे। फिर उ हदीस का जिक्र किहिन।