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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Abu Dawud : 2165

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي عَاصِمُ بْنُ حَكِيمٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي عَمْرٍو السَّيْبَانِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الدَّيْلَمِيِّ أَنَّ يَعْلَى ابْنَ مُنْيَةَ قَالَآذَنَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْغَزْوِ وَأَنَا شَيْخٌ كَبِيرٌ لَيْسَ لِي خَادِمٌ فَالْتَمَسْتُ أَجِيرًا يَكْفِينِي وَأُجْرِي لَهُ سَهْمَهُ فَوَجَدْتُ رَجُلًا فَلَمَّا دَنَا الرَّحِيلُ أَتَانِي فَقَالَ مَا أَدْرِي مَا السُّهْمَانِ وَمَا يَبْلُغُ سَهْمِي فَسَمِّ لِي شَيْئًا كَانَ السَّهْمُ أَوْ لَمْ يَكُنْ فَسَمَّيْتُ لَهُ ثَلَاثَةَ دَنَانِيرَ فَلَمَّا حَضَرَتْ غَنِيمَتُهُ أَرَدْتُ أَنْ أُجْرِيَ لَهُ سَهْمَهُ فَذَكَرْتُ الدَّنَانِيرَ فَجِئْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرْتُ لَهُ أَمْرَهُ فَقَالَ مَا أَجِدُ لَهُ فِي غَزْوَتِهِ هَذِهِ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ إِلَّا دَنَانِيرَهُ الَّتِي سَمَّى

हमसे [अहमद बिन सालिह] बताइस है, हमसे [अब्दुल्ला बिन वाहब] कहिस है, हमसे [अशिम बिन हकीम], [यह्या बिन अस सैबानी] से, [अब्दुल्ला बिन अद दैलामी] से कहिस है कि [य'ला बिन मुन्याह] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम युद्ध के घोषणा किहिन जब हम बूढ़ा रहेन अऊर हमरे पास कौनो नौकर नाहीं रहा। फिर हम एक भाड़े के मनई का ढूंढेन जवन हमार प्रतिनिधित्व करि अऊर हम ओका हिस्सा दिहेन। फिर हमका केहू मिला, फिर जब प्रस्थान के समय के पास रहा तौ ऊ मनई हमरे पास आवा अऊर कहिस; हम नाहीं जानित कि दुइनौ शेयर का हैं, अऊर हमका का शेयर मिली, तौ हमरे लिए कुछ नाम बतावा चाहे शेयर हैं या नाहीं। फिर हम उनसे तीन दीनार का जिक्र किहिन। फिर जब युद्ध के लूट आवै, तौ मैं ओका हिस्सा देब। तब मोका दीनार के पैसा याद आवा, तौ मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आवा अऊर मैं ओनका वहिके बारे मा समस्या बताइन। उ कहिन: 'मैंने उनके लिए न तो इस युद्ध में पाया न तो इस संसार में और न ही परलोक में, सिवाय उन कुछ दीनारों के, जिनका उ बताये हैं'।