इमाम अबू दाऊद : 1717
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْإِنَّمَا نَزَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمُحَصَّبَ لِيَكُونَ أَسْمَحَ لِخُرُوجِهِ وَلَيْسَ بِسُنَّةٍ فَمَنْ شَاءَ نَزَلَهُ وَمَنْ شَاءَ لَمْ يَنْزِلْهُ
हमें [अहमद बिन हंबल] ने बताया है, हमें [याह्या बिन सईद] ने [हिशाम] से [अपने पिता] से [आयशा] से बताया है, उन्होंने कहा; असल में, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल मुहश्शब पर रुके ताकि उनके लिए निकलना आसान हो, यह कोई सुन्नत बात नहीं है। इसलिए जो कोई उनके पास रुकना चाहे, वह रुक सकता है, और जो कोई उनके पास नहीं रुकना चाहता, वह नहीं रुक सकता।