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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम अबू दाऊद (الامام ابو داود) - 4590 हदीस

रसूलुल्लाह की नैतिकता जब बुझाई जाती है

इमाम अबू दाऊद : 1

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ الْقَعْنَبِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ عَنْ مُحَمَّدٍ يَعْنِي ابْنَ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا ذَهَبَ الْمَذْهَبَ أَبْعَدَ

हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा बिन क़नाब अल क़नाबी] ने [अब्दुल अज़ीज़ यानी बिन मुहम्मद] ने [मुहम्मद यानी बिन अम्रु] से [अबू सलामा] से [अल मुगीरा बिन स्यूबा] से बताया है कि जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शौच के लिए जाना चाहते थे, तो आप दूर रहे।

जब अल्लाह के रसूल ने बिना देखे शौच किया

इमाम अबू दाऊद : 2

حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَرَادَ الْبَرَازَ انْطَلَقَ حَتَّى لَا يَرَاهُ أَحَدٌ

[मुसद्दद बिन मुसरहद] ने हमें बताया है [ईसा बिन यूनुस] ने हमें [इस्माईल बिन अब्दुल मलिक] ने [अबू अज़ ज़ुबैर] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से बताया है कि जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद को शौच करना चाहा, तो वह यहां तक चले गए कि किसी ने उन्हें देखा नहीं।

रसूलुल्लाह का पेशाब करने का निर्देश

इमाम अबू दाऊद : 3

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا أَبُو التَّيَّاحِ قَالَ حَدَّثَنِي شَيْخٌ قَالَلَمَّا قَدِمَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ الْبَصْرَةَ فَكَانَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي مُوسَى فَكَتَبَ عَبْدُ اللَّهِ إِلَى أَبِي مُوسَى يَسْأَلُهُ عَنْ أَشْيَاءَ فَكَتَبَ إِلَيْهِ أَبُو مُوسَى إِنِّي كُنْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ فَأَرَادَ أَنْ يَبُولَ فَأَتَى دَمِثًا فِي أَصْلِ جِدَارٍ فَبَالَ ثُمَّ قَالَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَرَادَ أَحَدُكُمْ أَنْ يَبُولَ فَلْيَرْتَدْ لِبَوْلِهِ مَوْضِعًا

हमें बताया है [मूसा बिन इस्माइल] ने हमें बताया है [हम्माद] ने हमें बताया है [अबू अत तय्याह] ने कहा; हमें बताने के बाद [एक शेख] ने कहा; जब अब्दुल्लाह बिन अब्बास बसरा आए, जब उन्होंने [अबू मूसा] से हदीस सुनाई, तो अब्दुल्लाह ने अबू मूसा को कई चीजों के बारे में पूछने के लिए एक पत्र लिखा। तो अबू मूसा ने उन्हें (जवाब के तौर पर) एक पत्र लिखा, वास्तव में मैं एक दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ था, और वह पेशाब करना चाहता था, इसलिए वह दीवार के नीचे नरम जमीन वाली जगह पर गया, फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब तुम में से कोई पेशाब करना चाहे, तो उसे पेशाब करने के लिए नरम जमीन वाली जगह की तलाश करनी चाहिए।"

शौचालय में प्रवेश करते समय प्रार्थना

इमाम अबू दाऊद : 4

حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ وَعَبْدُ الْوَارِثِ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ قَالَ عَنْ حَمَّادٍ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ وَقَالَ عَنْ عَبْدِ الْوَارِثِ قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِقَالَ أَبُو دَاوُد رَوَاهُ شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ وَقَالَ مَرَّةً أَعُوذُ بِاللَّهِ و قَالَ وُهَيْبٌ فَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَمْرٍو يَعْنِي السَّدُوسِيَّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ هُوَ ابْنُ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسٍ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ وَقَالَ شُعْبَةُ وَقَالَ مَرَّةً أَعُوذُ بِاللَّهِ

हमें [मुसद्दद बिन मुसरहद] ने बताया है, हमें [हम्मद बिन ज़ैद] और [अब्दुल वारित्स] ने [अब्दुल अज़ीज़ बिन शुहैब] से [अनस] से बताया है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब वह टॉयलेट में जाना चाहते थे - उन्होंने (मुसद्दद) हम्माद से रिवायत किया - उन्होंने कहा: "ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ" - जबकि उन्होंने इसे अब्दुल हारिथ से रिवायत किया - उन्होंने कहा: "मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ मर्दों और औरतों शैतानों से।" अबू दाऊद ने कहा; स्यूबा ने अब्दुल अज़ीज़ से (लफ़ज़ के साथ) रिवायत किया; "ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ," एक और मौके पर उन्होंने (लफ़ज़ के साथ) रिवायत किया; "मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ", और वोहैब ने कहा; "उसे अल्लाह की पनाह लेनी चाहिए।" हमें बताया है [अल हसन बिन अमरू, यानी अस सदूसी] ने हमें बताया है [वाकी'] [स्यूबा] से [अब्दुल अज़ीज़, यानी इब्न शुहैब] से [अनस] से इस हदीस के शब्दों के साथ, उन्होंने (स्यूबा) अब्दुल अज़ीज़ से रिवायत किया; "ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ।" शुबा ने कहा; अब्दुल अज़ीज़ ने एक और मौके पर रिवायत किया (शब्दों के साथ); "मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ।"

जब आप किसी औषधि में प्रवेश करते हैं तो क्या पढ़ें

इमाम अबू दाऊद : 5

حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مَرْزُوقٍ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ النَّضِرِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ هَذِهِ الْحُشُوشَ مُحْتَضَرَةٌ فَإِذَا أَتَى أَحَدُكُمْ الْخَلَاءَ فَلْيَقُلْ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ

हमें बताया गया है कि [अमरू बिन मरज़ुक] ने हमें [स्यूबा] से [क़तदा] से [अन नदर बिन अनस] से [ज़ैद बिन अर्कम] से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, उन्होंने कहा: "वास्तव में, शौच की जगह शैतानों का निवास है, इसलिए जब आप में से कोई शौचालय के पास जाए, तो उसे कहना चाहिए: 'मैं पुरुष शैतानों और महिला शैतानों से अल्लाह की पनाह चाहता हूँ।'"

गायब होने और इस्तिनजा के संबंध में रसूलुल्लाह के निर्देश

इमाम अबू दाऊद : 6

حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ سَلْمَانَ قَالَقِيلَ لَهُ لَقَدْ عَلَّمَكُمْ نَبِيُّكُمْ كُلَّ شَيْءٍ حَتَّى الْخِرَاءَةَ قَالَ أَجَلْ لَقَدْ نَهَانَا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ بِغَائِطٍ أَوْ بَوْلٍ وَأَنْ لَا نَسْتَنْجِيَ بِالْيَمِينِ وَأَنْ لَا يَسْتَنْجِيَ أَحَدُنَا بِأَقَلَّ مِنْ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ أَوْ نَسْتَنْجِيَ بِرَجِيعٍ أَوْ عَظْمٍ

मुसद्दद बिन मुसरहद ने हमें बताया कि अबू मुअविया ने अल अमाश से इब्राहिम से अब्दुर्रहमान बिन यज़ीद से सलमान से कहा कि उनसे कहा गया कि क्या तुम्हारे नबी ने तुम्हें सब कुछ सिखाया है, यहाँ तक कि शौच भी? सलमान ने जवाब दिया कि हाँ, उन्होंने (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमें शौच या पेशाब करते समय क़िबला की ओर मुँह करने से मना किया है, कि हम दाहिने हाथ से स्तिन्जा न करें, कि हम में से कोई तीन से कम पत्थरों से स्तिन्जा न करे, या जानवरों की खाद या हड्डियों से स्तिन्जा न करे।

गायब होने और इस्तिंजा के संबंध में पैगंबर का व्यवहार

इमाम अबू दाऊद : 7

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ النُّفَيْلِيُّ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلَانَ عَنْ الْقَعْقَاعِ بْنِ حَكِيمٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا أَنَا لَكُمْ بِمَنْزِلَةِ الْوَالِدِ أُعَلِّمُكُمْ فَإِذَا أَتَى أَحَدُكُمْ الْغَائِطَ فَلَا يَسْتَقْبِلْ الْقِبْلَةَ وَلَا يَسْتَدْبِرْهَا وَلَا يَسْتَطِبْ بِيَمِينِهِ وَكَانَ يَأْمُرُ بِثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ وَيَنْهَى عَنْ الرَّوْثِ وَالرِّمَّةِ

हमें [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद अन नुफैली] ने बताया है, हमें [इब्नुल मुबारक] ने [मुहम्मद बिन अजलान] से [अल क़ाक़ा बिन हकीम] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] से बताया है, उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बेशक, मैं तुम्हारे लिए सिर्फ़ एक माता-पिता की तरह हूँ, मैं तुम्हें सिखाता हूँ; जब तुम में से कोई पेशाब करना चाहे, तो क़िबला की ओर मुँह न करे, न ही अपनी पीठ करे, और अपने दाहिने हाथ से नमाज़ न पढ़े।" और उन्होंने तीन पत्थरों पर नमाज़ पढ़ने का भी हुक्म दिया, और जानवरों की लीद और गीली हड्डियों पर नमाज़ पढ़ने से मना किया।

क़िब्लात की ओर मुख करने पर रसूलुल्लाह के विचार

इमाम अबू दाऊद : 8

حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ رِوَايَةًقَالَ إِذَا أَتَيْتُمْ الْغَائِطَ فَلَا تَسْتَقْبِلُوا الْقِبْلَةَ بِغَائِطٍ وَلَا بَوْلٍ وَلَكِنْ شَرِّقُوا أَوْ غَرِّبُوافَقَدِمْنَا الشَّامَ فَوَجَدْنَا مَرَاحِيضَ قَدْ بُنِيَتْ قِبَلَ الْقِبْلَةِ فَكُنَّا نَنْحَرِفُ عَنْهَا وَنَسْتَغْفِرُ اللَّهَ

हमें [मुसद्दद बिन मुसरहद] ने [सुफ़यान] ने [अज़ ज़ुहरी] से [अथा` बिन यज़ीद अल लैतसी] से [अबू अय्यूब] से बताया है, जिसे उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रिवायत किया, उन्होंने कहा: "जब तुम शौच करने के लिए किसी जगह पर जाओ, तो शौच और पेशाब करते समय क़िबला की ओर मुँह न करो, बल्कि पूरब या पश्चिम की ओर मुँह करो।" फिर हम सीरिया आए, और हमने देखा कि शौच की जगहें क़िबला की ओर मुँह करके बनाई गई थीं, तो हमने उनसे मुँह मोड़ लिया और अल्लाह से माफ़ी मांगी।

बचाव करते समय क़िबला की ओर मुंह करने पर प्रतिबंध

इमाम अबू दाऊद : 9

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ يَحْيَى عَنْ أَبِي زَيْدٍ عَنْ مَعْقِلِ بْنِ أَبِي مَعْقِلٍ الْأَسَدِيِّ قَالَنَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَتَيْنِ بِبَوْلٍ أَوْ غَائِطٍقَالَ أَبُو دَاوُد وَأَبُو زَيْدٍ هُوَ مَوْلَى بَنِي ثَعْلَبَةَ

हमें बताया है [मूसा बिन इस्माइल] ने हमें बताया है [वुहैब] ने हमें बताया है [अमरू बिन याह्या] [अबू ज़ैद] से [अबू मक़ील अल असदी] ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें शौच या पेशाब करते समय दो क़िबलों (मक्का और बैतुल मक़दिस) की ओर मुँह करने से मना किया है। अबू दाऊद ने कहा; अबू ज़ैद बानू त्सा'लाबा के पहले सहाया थे।

इब्नु उमर ने खुले स्थान पर क़िबला की ओर मुंह करके पानी निकाला

इमाम अबू दाऊद : 10

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ فَارِسٍ حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى عَنْ الْحَسَنِ بْنِ ذَكْوَانَ عَنْ مَرْوَانَ الْأَصْفَرِ قَالَرَأَيْتُ ابْنَ عُمَرَ أَنَاخَ رَاحِلَتَهُ مُسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةِ ثُمَّ جَلَسَ يَبُولُ إِلَيْهَا فَقُلْتُ يَا أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَلَيْسَ قَدْ نُهِيَ عَنْ هَذَا قَالَ بَلَى إِنَّمَا نُهِيَ عَنْ ذَلِكَ فِي الْفَضَاءِ فَإِذَا كَانَ بَيْنَكَ وَبَيْنَ الْقِبْلَةِ شَيْءٌ يَسْتُرُكَ فَلَا بَأْسَ

मुहम्मद बिन याह्या बिन फारिस ने हमें बताया है कि शफवान बिन ईसा ने अल हसन बिन जकवान से मरवान अल अशफर से कहा है कि मैंने एक बार इब्न उमर को देखा कि उनका ऊँट क़िबला की तरफ मुंह करके खड़ा है, फिर वह बैठ गया और मुँह करके पेशाब कर दिया, फिर मैंने पूछा, "ऐ अबू अब्दुर्रहमान, क्या यह हराम नहीं है?" उन्होंने जवाब दिया, "हाँ, लेकिन अगर तुम इसे खुली जगह पर करते हो तो यह हराम है, अगर तुम्हारे और क़िबला के बीच कोई चीज़ है जो तुम्हें ढक रही है, तो यह ठीक है।"

रसूलुल्लाह ने बैतुल मक़दिस के सामने शौच कर दिया

इमाम अबू दाऊद : 11

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ عَمِّهِ وَاسِعِ بْنِ حَبَّانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَلَقَدْ ارْتَقَيْتُ عَلَى ظَهْرِ الْبَيْتِ فَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى لَبِنَتَيْنِ مُسْتَقْبِلَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ لِحَاجَتِهِ

उन्होंने हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] से [मलिक] से [याह्या बिन सईद] से [मुहम्मद बिन याह्या बिन हब्बन] से [अपने चाचा, वसी बिन हब्बन] से [अब्दुल्ला बिन उमर] तक बताया; "वास्तव में, मैं एक बार एक घर की छत पर चढ़ा, फिर मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बैतुल मकदिस की ओर दो ईंटों पर शौच करते हुए देखा।"

क़िबलात के प्रति पैग़म्बर की आदतों में परिवर्तन

इमाम अबू दाऊद : 12

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ سَمِعْتُ مُحَمَّدَ بْنَ إِسْحَقَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبَانَ بْنِ صَالِحٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَنَهَى نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ بِبَوْلٍ فَرَأَيْتُهُ قَبْلَ أَنْ يُقْبَضَ بِعَامٍ يَسْتَقْبِلُهَا

मुहम्मद बिन बसिस्यार ने हमें बताया है, वहब बिन जरीर ने हमें बताया है, मेरे पिता ने कहा; मैंने एक बार मुहम्मद बिन इसहाक को अबान बिन सलीह से, मुजाहिद से, जाबिर बिन अब्दुल्ला से एक हदीस कहते सुना था, उन्होंने कहा; नबीउल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें पेशाब करते समय क़िबला की ओर मुँह करने से मना किया था, फिर मैंने उन्हें मरने से एक साल पहले क़िबला की ओर मुँह करके पेशाब करते हुए देखा।

रसूलुल्लाह ने हार का सामना कैसे किया

इमाम अबू दाऊद : 13

حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ رَجُلٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَرَادَ حَاجَةً لَا يَرْفَعُ ثَوْبَهُ حَتَّى يَدْنُوَ مِنْ الْأَرْضِقَالَ أَبُو دَاوُد رَوَاهُ عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ حَرْبٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ وَهُوَ ضَعِيفٌ قَالَ أَبُو عِيسَى الرَّمْلِيُّ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بِهِ

हमें बताया गया है कि [ज़ुहैर बिन हरब] ने हमें [वाकी'] [अल अमासी] से [एक आदमी] [इब्न उमर] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब वह खुद को शौच करना चाहते थे, तो उन्होंने अपने कपड़े तब तक नहीं उठाए जब तक कि वह ज़मीन के पास न हों। अबू दाऊद ने कहा; [अब्दुस्सलाम बिन हरब] ने [अल अमासी] से [अनस बिन मलिक] से वर्णित किया, लेकिन वह (अल अमासी) एक ज़ईफ़ थे। अबू ईसा अर रामली ने कहा; हमें बताया है अहमद बिन अल वालिद ने हमें बताया है अम्रु बिन औन ने हमें इस हदीस के साथ अब्दुस्सलाम को बताया है।

सेक्स स्थलों पर बातचीत पर प्रतिबन्ध

इमाम अबू दाऊद : 14

حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ مَيْسَرَةَ حَدَّثَنَا ابْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ هِلَالِ بْنِ عِيَاضٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَخْرُجْ الرَّجُلَانِ يَضْرِبَانِ الْغَائِطَ كَاشِفَيْنِ عَنْ عَوْرَتِهِمَا يَتَحَدَّثَانِ فَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يَمْقُتُ عَلَى ذَلِكَقَالَ أَبُو دَاوُد هَذَا لَمْ يُسْنِدْهُ إِلَّا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ

हमें बताया है [उबैदुल्लाह बिन उमर बिन मैसरा] ने हमें बताया है [इबनू महदी] ने हमें बताया है [इकरीमा बिन अम्मार] ने [याह्या बिन अबू कथिर] से [हिलाल बिन इयाद] से कहा; मुझे बताया है [अबू सईद] ने कहा; मैंने एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "दो आदमियों को शौच के लिए एक जगह पर अपने प्राइवेट पार्ट खुले रखकर जाने न दो, फिर बात करो, क्योंकि अल्लाह अज़्ज़ा वजल्ला को इससे नफ़रत है।" अबू दाऊद ने कहा; यह बात इक्रीमा बिन अम्मार के अलावा किसी और ने नहीं कही।

पेशाब करते समय अभिवादन का जवाब देना

इमाम अबू दाऊद : 15

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ وَأَبُو بَكْرِ ابْنَا أَبِي شَيْبَةَ قَالَا حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الضَّحَّاكِ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَمَرَّ رَجُلٌ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَبُولُ فَسَلَّمَ عَلَيْهِ فَلَمْ يَرُدَّ عَلَيْهِقَالَ أَبُو دَاوُد وَرُوِيَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَغَيْرِهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَيَمَّمَ ثُمَّ رَدَّ عَلَى الرَّجُلِ السَّلَامَ

हमें बताया गया है कि [उथमान] और [अबू बक्र], दोनों अबू सय्यबा के बेटे, उन्होंने कहा; हमें [उमर बिन साद] ने [सुफियान] से [अज़ धाक बिन उथमान] से [नफी] से [इब्न उमर] से बताया है उन्होंने कहा; एक बार एक आदमी था जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास से गुजरा जब वह पेशाब कर रहे थे, तो उस आदमी ने उन्हें नमस्ते कहा, लेकिन उन्होंने उसके अभिवादन का जवाब नहीं दिया। अबू दाऊद ने कहा; यह इब्न उमर और दूसरों से वर्णित है, कि जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तयम्मुम किया, तो उन्होंने उस आदमी के अभिवादन का जवाब दिया।

अभिवादन का जवाब देना और पवित्रता

इमाम अबू दाऊद : 16

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ حُضَيْنِ بْنِ الْمُنْذِرِ أَبِي سَاسَانَ عَنْ الْمُهَاجِرِ بْنِ قُنْفُذٍ أَنَّهُأَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَبُولُ فَسَلَّمَ عَلَيْهِ فَلَمْ يَرُدَّ عَلَيْهِ حَتَّى تَوَضَّأَ ثُمَّ اعْتَذَرَ إِلَيْهِ فَقَالَ إِنِّي كَرِهْتُ أَنْ أَذْكُرَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ إِلَّا عَلَى طُهْرٍ أَوْ قَالَ عَلَى طَهَارَةٍ

हमें बताया है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] ने हमें बताया है [अब्दुल अ'ला] ने हमें बताया है [सईद] [क़तादा] से [अल हसन] से [हुदैन बिन अल मुंदज़िर अबी ससन] से [अल मुहाजिर बिन कुनफुदज़] से कि वह एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले जब वह पेशाब कर रहे थे, फिर उन्होंने पैगंबर को नमस्ते कहा, लेकिन उन्होंने उनके अभिवादन का जवाब तब तक नहीं दिया जब तक कि वुज़ू नहीं कर लिया, फिर उन्होंने माफ़ी मांगी और कहा: "वास्तव में, मैं अल्लाह तआला के नाम का उल्लेख करना पसंद नहीं करता जब तक कि यह पवित्र न हो।"

रसूलुल्लाह हमेशा अल्लाह से दुआ करते थे

इमाम अबू दाऊद : 17

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي زَائِدَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ خَالِدِ بْنِ سَلَمَةَ يَعْنِي الْفَأْفَاءَ عَنْ الْبَهِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَذْكُرُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى كُلِّ أَحْيَانِهِ

मुहम्मद बिन अल-अला ने हमें बताया है कि इब्न अबी ज़ैदा ने अपने पिता से, खालिद बिन सलामा से, यानी अल-फ़ाफ़ा से, बहिया से, उरवाह से, आइशा से कहा; रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हर हालत में अल्लाह अज़्ज़ा वजल्ला का ज़िक्र किया।

पैगम्बर ने शौचालय में प्रवेश करने से पहले अंगूठी हटा दी

इमाम अबू दाऊद : 18

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ أَبِي عَلِيٍّ الْحَنَفِيِّ عَنْ هَمَّامٍ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَنَسٍ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ وَضَعَ خَاتَمَهُقَالَ أَبُو دَاوُد هَذَا حَدِيثٌ مُنْكَرٌ وَإِنَّمَا يُعْرَفُ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اتَّخَذَ خَاتَمًا مِنْ وَرِقٍ ثُمَّ أَلْقَاهُ وَالْوَهْمُ فِيهِ مِنْ هَمَّامٍ وَلَمْ يَرْوِهِ إِلَّا هَمَّامٌ

हमें [नश्र बिन अली] ने [अबू अली अल हनफी] से [हम्माम] से [इब्न जुरैज] से [अज़ ज़ुहरी] से [अनस] से बताया है कि उन्होंने कहा; जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शौचालय में प्रवेश करना चाहते थे, तो उन्होंने अपनी अंगूठी उतार दी। अबू दाऊद ने कहा; यह एक बुरी हदीस है, जबकि [इब्न जुरैज] से [ज़ियाद बिन सआद] से [अज़ ज़ुहरी] से [अनस] से ज्ञात है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक चांदी की अंगूठी का इस्तेमाल किया और फिर उसे फेंक दिया। यहां त्रुटि हम्माम से है, और यह हदीस हम्माम के अलावा वर्णित नहीं की गई है।

पवित्र न होने और दूसरों के विरुद्ध षडयंत्र रचने के कारण कब्र की यातना

इमाम अबू दाऊद : 19

حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَهَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ قَالَ سَمِعْتُ مُجَاهِدًا يُحَدِّثُ عَنْ طَاوُسٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَمَرَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى قَبْرَيْنِ فَقَالَ إِنَّهُمَا يُعَذَّبَانِ وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ أَمَّا هَذَا فَكَانَ لَا يَسْتَنْزِهُ مِنْ الْبَوْلِ وَأَمَّا هَذَا فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ ثُمَّ دَعَا بِعَسِيبٍ رَطْبٍ فَشَقَّهُ بِاثْنَيْنِ ثُمَّ غَرَسَ عَلَى هَذَا وَاحِدًا وَعَلَى هَذَا وَاحِدًا وَقَالَ لَعَلَّهُ يُخَفَّفُ عَنْهُمَا مَا لَمْ يَيْبَسَا قَالَ هَنَّادٌ يَسْتَتِرُ مَكَانَ يَسْتَنْزِهُحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَعْنَاهُ قَالَ كَانَ لَا يَسْتَتِرُ مِنْ بَوْلِهِ وَقَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ يَسْتَنْزِهُ

हमें [ज़ुहैर बिन हर्ब] और [हन्नाद बिन अस सारी] ने बताया है, उन दोनों ने कहा; हमें [वाकी] ने बताया है, हमें [अल अमासी] ने बताया है, उसने कहा; मैंने [मुजाहिद] को [थावस] से [इब्न अब्बास] से कहते सुना, उसने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार दो कब्रों के पास से गुज़रे और कहा: "बेशक, उन दोनों को सज़ा दी जा रही है, और दोनों को बड़े गुनाहों की सज़ा नहीं दी जा रही है। जहाँ तक इस वाली की बात है, तो यह इसलिए है क्योंकि उसने पेशाब करके खुद को पवित्र नहीं किया है, जबकि यह इसलिए है क्योंकि वह नमी के साथ चलता है।" फिर उन्होंने किसी को खजूर की गीली टहनी लेने का आदेश दिया, फिर उसे आधा काट दिया, फिर उसने उसे इस कब्र में लगाया और एक दूसरी कब्र में लगाया, और उन्होंने कहा: "उम्मीद है कि वह दोनों को हल्का कर देगा जब तक कि वे सूखी न हों।" हन्नाद ने यस्तानज़िह जगह पर लफ़ज़ यस्ततिर के साथ सुनाया। हमें बताया है [उथमान बिन अबू सय्यबा] ने हमें बताया है [जरीर] [मंसूर] से [मुजाहिद] से [इब्न अब्बास] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, जिसका मतलब ऊपर लिखा है, उन्होंने कहा; "उसने पेशाब करने से खुद को नहीं ढका", जबकि मुअविया ने कहा; "वह पवित्र नहीं है।"

सुरक्षा के रूप में ढाल का उपयोग करना

इमाम अबू दाऊद : 20

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ زَيْدِ بْنِ وَهْبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَسَنَةَ قَالَانْطَلَقْتُ أَنَا وَعَمْرُو بْنُ الْعَاصِ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَخَرَجَ وَمَعَهُ دَرَقَةٌ ثُمَّ اسْتَتَرَ بِهَا ثُمَّ بَالَ فَقُلْنَا انْظُرُوا إِلَيْهِ يَبُولُ كَمَا تَبُولُ الْمَرْأَةُ فَسَمِعَ ذَلِكَ فَقَالَ أَلَمْ تَعْلَمُوا مَا لَقِيَ صَاحِبُ بَنِي إِسْرَائِيلَ كَانُوا إِذَا أَصَابَهُمْ الْبَوْلُ قَطَعُوا مَا أَصَابَهُ الْبَوْلُ مِنْهُمْ فَنَهَاهُمْ فَعُذِّبَ فِي قَبْرِهِقَالَ أَبُو دَاوُد قَالَ مَنْصُورٌ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ أَبِي مُوسَى فِي هَذَا الْحَدِيثِ قَالَ جِلْدِ أَحَدِهِمْ و قَالَ عَاصِمٌ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ أَبِي مُوسَى عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ جَسَدِ أَحَدِهِمْ

हमें बताया है [मुसद्दद] ने हमें बताया है [अब्दुलवाहिद बिन ज़ियाद] ने हमें बताया है [अल अमासी] [ज़ैद बिन वहब] से [अब्दुर्रहमान बिन हसनाह] ने कहा; मैं एक बार अम्रु बिन अल अश के साथ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने गया था, फिर वह एक ढाल लेकर बाहर आए, फिर उससे खुद को ढक लिया और पेशाब कर दिया। तो हम कहते हैं; "देखो, वह एक महिला की तरह पेशाब करता है।" पैगंबर ने यह सुना, तो उन्होंने कहा: "क्या तुम नहीं जानते कि इसराइल के बच्चों में से एक को क्या मिला? अतीत में, जब इसराइल के बच्चे पेशाब के संपर्क में आते थे, तो उन्होंने उस हिस्से को काट दिया जो पेशाब से सना हुआ था, फिर व्यक्ति ने उन्हें ऐसा करने से मना किया, इसलिए उसे उसकी कब्र में दंडित किया गया।" अबू दाऊद ने कहा; [मंसूर] ने [अबू वाइल] से [अबू मूसा] से इस हदीस के बारे में कहा, उन्होंने उल्लेख किया; (अर्थात, यदि यह उनमें से किसी एक की त्वचा को छू ले)। जबकि ['आशिम] ने [अबू व'इल] से [अबू मूसा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, उन्होंने कहा: "उनमें से एक का शरीर।"