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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Abu Dawud : 1717

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْإِنَّمَا نَزَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمُحَصَّبَ لِيَكُونَ أَسْمَحَ لِخُرُوجِهِ وَلَيْسَ بِسُنَّةٍ فَمَنْ شَاءَ نَزَلَهُ وَمَنْ شَاءَ لَمْ يَنْزِلْهُ

सानु [अहमद बिन हनबल] दस्सेया है, [यह्या बिन सईद] नू [हिशाम] तों [अपने पिता] तों [आइशा] तों दस्सेया है, उसने आख्या; दरअसल, रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल मुहशशाब च रुकी गे तां जे उसी छोड़ना आसान होई जा, ए कोई सुन्नत दी गल्ल नेईं ऐ। तो जो उसदे कोल रुकना चाहंदा है, ओ रुक सकदा है, ते जो उसदे कोल रुकना नहीं चाहंदा, ओ रुक नहीं सकदा।