Imam Abu Dawud : 1480
حَدَّثَنَا أَبُو مَعْمَرٍ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرِو بْنِ أَبِي الْحَجَّاجِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ حَدَّثَنَا عُتْبَةُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ السَّهْمِيُّ حَدَّثَنِي زُرَارَةُ بْنُ كُرِيْمٍ أَنَّ الْحَارِثَ بْنَ عَمْرٍو السَّهْمِيَّ حَدَّثَهُ قَالَأَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ بِمِنًى أَوْ بِعَرَفَاتٍ وَقَدْ أَطَافَ بِهِ النَّاسُ قَالَ فَتَجِيءُ الْأَعْرَابُ فَإِذَا رَأَوْا وَجْهَهُ قَالُوا هَذَا وَجْهٌ مُبَارَكٌ قَالَ وَوَقَّتَ ذَاتَ عِرْقٍ لِأَهْلِ الْعِرَاقِ
हमसे [अबू ममर अब्दुल्लाह बिन अमर बिन अबू अल हज्जाज], हमसे [अब्दुल वारित्स] कहिन, हमसे [उत्बाह बिन अब्दुल मलिक अस सहमी] कहिन, हमसे [जुरराह बिन कुरैम] कहिन कि [अल हरिथ बिन अमर अस सहमी] ने उनसे कहा है, उ कहिन हैं; जब उ मीना या अराफा मा रहे, तब हम रसूलुल्लाह शाल्लल्लाहु वअलेहि वसल्लम के पास आये रहेन, अऊर लोग ओनका घेर लिहिन रहैं। अल हरिथ बिन अमर ने कहा; तब कुछ बेडौइन आए अऊर ओकर चेहरा देखिन, उ कहिन; ई एक धन्य चेहरा है। अल हरिथ कहिन; अऊर उ इराक के लोगन के लिए मिकात के रूप मा डजातु इरक का स्थापित किहिन।