Bahwa Rasulullah menutupi tempat kencing ketika kencing sebagaimana tertutupnya sebuah rumah
Imam Abu Dawud : 32
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى الرَّازِيُّ أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ عَنْ ثَوْرٍ عَنْ الْحُصَيْنِ الْحُبْرَانِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ اكْتَحَلَ فَلْيُوتِرْ مَنْ فَعَلَ فَقْدَ أَحْسَنَ وَمَنْ لَا فَلَا حَرَجَ وَمَنْ اسْتَجْمَرَ فَلْيُوتِرْ مَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَحْسَنَ وَمَنْ لَا فَلَا حَرَجَ وَمَنْ أَكَلَ فَمَا تَخَلَّلَ فَلْيَلْفِظْ وَمَا لَاكَ بِلِسَانِهِ فَلْيَبْتَلِعْ مَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَحْسَنَ وَمَنْ لَا فَلَا حَرَجَ وَمَنْ أَتَى الْغَائِطَ فَلْيَسْتَتِرْ فَإِنْ لَمْ يَجِدْ إِلَّا أَنْ يَجْمَعَ كَثِيبًا مِنْ رَمْلٍ فَلْيَسْتَدْبِرْهُ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَلْعَبُ بِمَقَاعِدِ بَنِي آدَمَ مَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَحْسَنَ وَمَنْ لَا فَلَا حَرَجَقَالَ أَبُو دَاوُد رَوَاهُ أَبُو عَاصِمٍ عَنْ ثَوْرٍ قَالَ حُصَيْنٌ الْحِمْيَرِيُّ وَرَوَاهُ عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ عَنْ ثَوْرٍ فَقَالَ أَبُو سَعِيدٍ الْخَيْرُ قَالَ أَبُو دَاوُد أَبُو سَعِيدٍ الْخَيْرُ هُوَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे कहिन है [इब्राहिम बिन मूसा अर रज़ी] हमसे कहिन है [ईसा बिन यूनुस] से [त्सौर] से [अल हुशैन अल हुबरानी] से [अबू सैद] से [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'जे धोखा देत है, ओका अजीब तरह से करै का चाही, जे अच्छा करत है, तब उ वहाँ नाहीं करत है। ओकरे बरे कउनो पाप नाहीं है। जे पत्थर से प्रार्थना करत है, ऊ अजीब तरह से करै, जे अइसन करत है, ऊ भलाई किहिस है अऊर जे अइसन नाहीं करत है, ओकरे ऊपर कौनो पाप नाहीं है। जे खात है, ऊ जवन कुछ शामिल है, ओका फेंक दे, अऊर जवन जीभ से हटावा जा सकत है, ओका निगल लेय। जे अइसन करत है ऊ भलाई किहिस है अऊर जे ई नाहीं करत है ओकरे लिए कौनो पाप नाहीं है। जे भी शौचालय मा आवै, ओका एक व्यंग्य -कवर- ले जाय, अऊर अगर ओका बालू के ढेर इकट्ठा करै के अलावा एकौ न मिलै, तौ ओका पीठ फेरै, काहे से कि वास्तव मा ऊ आदम के बच्चा के सीट से खेलत है। जे ई करत है तौ ऊ अच्छा किहिस है अऊर जे ई नाहीं करत है, ओकरे लिए कौनो पाप नाहीं है'। अबू दाउद ने कहा; [त्सौर] से [अबू आशिम] द्वारा सुनावा गा है। हुशैन अल हिम्यारी ने कहा; अऊर [त्सौर] से [अब्दुल मलिक बिन अश शब्बाह] द्वारा सुनावा गा है, उ कहिन; [अबू सईद अल खैर]। अबू दाउद ने कहा; अबू सैद अल खैर पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथियन मा से रहे।