हदीस
Al Akhir
Imam Ahmad : 10254حَدَّثَنَا رَوْحٌ وَأَبُو النَّضْرِ قَالَا حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ أَبِي الرَّبِيعِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ مِنْ دُعَائِهِ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ وَإِسْرَافِي وَمَا أَنْتَ أَعْلَمُ بِهِ مِنِّي أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ
हमनी के [रौह] आ [अबू अन नदर] के बतावल गइल बा कि ऊ लोग कहल कि; हमनी के [अल मसौदी] के [अलकामा बिन मार्तसाद] से [अबू अर रबी'] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े, उ कहले; कि रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पढ़ल नमाज में से रहे: 'अल्लाहमुममघफिरली माँ गद्दामतु वामा अखखारतु वामा असरर्तु वामा अ'लंटू वा इसराफी वामा अंता अ'लामू मिन्नी बीहि अंतल मुकददम वा अंतल मु`अखखार ला इलहा इला अनता - हे अल्लाह, हमरा के माफ करऽ, बीतल आ भविष्य के पाप, जवन हम गुप्त रूप से कइले बानी आ जवन खुल के कइले बानी आ ओहमें जवन अतिशयोक्ति कइले बानी। साथ ही, जवन तू हमरा से बेहतर जानत बाड़ू, तू पहिला आ आखिरी हउअ, तोहरा छोड़ के कवनो भगवान के पूजा के लायक नइखे-'।