हदीस
Al Qawiyy
Imam Ahmad : 10769حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ حُبِسْنَا يَوْمَ الْخَنْدَقِ عَنْ الصَّلَوَاتِ حَتَّى كَانَ بَعْدَ الْمَغْرِبِ هَوِيًّا وَذَلِكَ قَبْلَ أَنْ يَنْزِلَ فِي الْقِتَالِ مَا نَزَلَ فَلَمَّا كُفِينَا الْقِتَالَ وَذَلِكَ قَوْلُهُ { وَكَفَى اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ الْقِتَالَ وَكَانَ اللَّهُ قَوِيًّا عَزِيزًا } أَمَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَالًا فَأَقَامَ الظُّهْرَ فَصَلَّاهَا كَمَا يُصَلِّيهَا فِي وَقْتِهَا ثُمَّ أَقَامَ الْعَصْرَ فَصَلَّاهَا كَمَا يُصَلِّيهَا فِي وَقْتِهَا ثُمَّ أَقَامَ الْمَغْرِبَ فَصَلَّاهَا كَمَا يُصَلِّيهَا فِي وَقْتِهَا حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ فَذَكَرَهُ بِإِسْنَادِهِ وَمَعْنَاهُ وَزَادَ فِيهِ قَالَ وَذَلِكَ قَبْلَ أَنْ يَنْزِلَ صَلَاةَ الْخَوْفِ { فَرِجَالًا أَوْ رُكْبَانًا }
हमनी के बतवले बा [याह्या] कहले बा; हमनी के बतवले बाड़े [इब्न अबू डीजी`ब] कहले बाड़े; हमनी के [सईद बिन अबू सईद] [अब्दुररहमान बिन अबू सईद] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े, उ कहले; 'खंडक युद्ध के दौरान हमनी के नमाज पढ़े से रोकल गईल रहे ताकि सूर्यास्त के बहुत समय हो गईल रहे, अवुरी इ घटना युद्ध के दौरान नमाज के व्याख्या करेवाला आयत के प्रकट होखे से पहिले भईल रहे।' त जब युद्ध खतम हो गईल, अवुरी इ ओसही रहे जईसे उ कहले रहले कि, 'आ अल्लाह मुसलमान के युद्ध से बख्श देले।' आ अल्लाह परम ताकतवर, परम ताकतवर हउवें, 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बिलाल के नमाज पुकारे के आदेश दिहले, ओकरा बाद उ दुपहरिया के नमाज के नमाज के मुताबिक समय प नमाज के मुताबिक कईले, अवुरी समय प नमाज के मुताबिक असर के नमाज कईले, उ मगरीब के नमाज के नमाज प नमाज प कईले।' हमनी के [अबू खालिद अल अहमर] [इब्न अबू डीजी`ब] से बतवले बाड़े तब उ हदीस के मतलब अवुरी ओकर सनाद के जिक्र कईले बाड़े, अवुरी इहाँ उ जोड़ले बाड़े; ऊ कहले कि; 'आ ऊ खौफ नमाज के आयत के प्रकट होखे से पहिले भइल रहे; 'फिर पैदल भा गाड़ी चलावत घरी प्रार्थना करीं'।