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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Allah Asma’ul husnaa Al Jalil

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Al Jalil
Imam Abu Dawud : 658

حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ مُطَهَّرٍ حَدَّثَنَا جَعْفَرٌ عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَلِيٍّ الرِّفَاعِيِّ عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ النَّاجِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ كَبَّرَ ثُمَّ يَقُولُ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرَكَ ثُمَّ يَقُولُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ ثَلَاثًا ثُمَّ يَقُولُ اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا ثَلَاثًا أَعُوذُ بِاللَّهِ السَّمِيعِ الْعَلِيمِ مِنْ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ مِنْ هَمْزِهِ وَنَفْخِهِ وَنَفْثِهِ ثُمَّ يَقْرَأُقَالَ أَبُو دَاوُد وَهَذَا الْحَدِيثُ يَقُولُونَ هُوَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ الْحَسَنِ مُرْسَلًا الْوَهْمُ مِنْ جَعْفَرٍ

हमनी के बतवले बा [अब्दुस्सलम बिन मुत्थहिर] हमनी के [जफर] से [अली बिन अली अर रिफाई] से [अबू अल मुतवक्किल अन नाजी] से [अबू सईद अल खुदरी] से बतवले बाड़े उ कहले; 'जब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रात में नमाज पढ़े उठले त तकबीर कहले अवुरी फेर कहले: 'सुभानका अल्लाहम्मा वाबिहमदीका वतबरकस्मुका वा तआला जदुका वला इलाहा घैराका -महिमामंडित बानी, हे अल्लाह, हम आपके स्तुति क के आपके नाम के पवित्र करतानी, तोहार नाम धन्य बा, सबसे महिमा।' तोहार महिमा ह आ तोहरा अलावा कवनो देवता नइखे-'। फिर पढ़ीं: 'ला इलाहा इल्लाह -अल्लाह के अलावा कवनो भगवान नइखे- तीन बेर, फिर पढ़ीं: 'अल्लाह अकबर कबीरा -अल्लाह सबसे बड़ हवें, सही मायने में सबसे बड़ हवें-'। तीन बेर- -फिर पढ़ीं-: अ'उद्ज़ू बिल्लाहिस समी'इल 'अलीम मिनास स्याइथानीर रजीम मिन हमज़िहिई वनाफखिही वा नफ्तसीही -हम अल्लाह के शरण लेत बानी, जे सर्वसुनदार, शापित शैतान के प्रलोभन से सर्वज्ञ हवें, ओकर पागलपन से, ओकर अहंकार से आ ओकर खराब कविता से-'। तब उ पढ़ले -कुरान के अक्षर-'। अबू दाउद कहले कि; 'उ लोग -कथाकार लोग- कहलस; ई हदीस मुरसल में अल हसन से अली बिन अली के ह, आ जा'फर' से वहम -संदेह-।

हदीस :

Imam Abu Dawud : 658, 659, 708