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Rasulullah melarang bepergian dengan membawa Al Qur'an ke negeri musuh
Imam Ibnu Majah : 2870حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ وَأَبُو عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى أَنْ يُسَافَرَ بِالْقُرْآنِ إِلَى أَرْضِ الْعَدُوِّ مَخَافَةَ أَنْ يَنَالَهُ الْعَدُوُّ
[अहमद बिन सिनान] आरू [अबू उमर] दोनों न॑ कहलकै: [अब्दुररहमान बिन महदी] न॑ [मलिक बिन अनस] स॑ [नफी’] स॑ [इब्न उमर] स॑ हमरा सब क॑ बतैलकै, वू कहलकै: ‘सत्ते, अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) न॑ ककरो कुरान के साथ दुश्मन केरऽ इलाका म॑ यात्रा करै स॑ मना करी देलकै, ई डर स॑ कि दुश्मन करी लेतै लऽ लिअ।'