प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 4858
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ حَدَّثَنَا مُسْلِمٌ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْخَيَّرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاخْتَرْنَا اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَلَمْ يَعُدَّ ذَلِكَ عَلَيْنَا شَيْئًا
हमसे कहा है [उमर बिन हफ्श] हमसे कहा है [मेरे पिता] हमसे कहा है [अल अमासी] हमसे कहा है [मुसलमानों] से [मसरुक] से [ऐस्या] रदलिअल्लाहु अन्हा, उन्होंने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार हमें एक विकल्प दिया, तो हमने अल्लाह और उसके रसूल को चुना। और उन्होंने इसे बिल्कुल भी ठलक नहीं माना।"