हदीस
Rasulullah melarang nikah secara mut'ah
Imam Nasa'i : 4260أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ وَاللَّفْظُ لَهُ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ مُحَمَّدٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِمَا قَالَقَالَ عَلِيٌّ لِابْنِ عَبَّاسٍ إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ نِكَاحِ الْمُتْعَةِ وَعَنْ لُحُومِ الْحُمُرِ الْأَهْلِيَّةِ يَوْمَ خَيْبَرَ
इतिहास पढ़ के हमनी के [मुहम्मद बिन मंसूर] अवुरी [अल हरिथ बिन मिस्किन] के जानकारी देले बाड़े अवुरी हम सुनले बानी, लफाझ्न्या [सुफयान] से [अज जुहरी] से [अल हसन बिन मुहम्मद] से अवुरी [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद] से [उनकर पिता] से लफाज अल हरित ह, उ कहले; [अली] इब्न अब्बास से कहले; दरअसल, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खैबर युद्ध के दौरान मुतअह बियाह अवुरी गदहा के मांस के वश में करे से मना कईले रहले।