प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 2226
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَابْنُ نُمَيْرٍ جَمِيعًا عَنْ أَبِي خَالِدٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ قَالَ رَأَيْتُ ابْنَ عُمَرَ يَسْتَلِمُ الْحَجَرَ بِيَدِهِ ثُمَّ قَبَّلَ يَدَهُ وَقَالَ مَا تَرَكْتُهُ مُنْذُ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَفْعَلُهُ
हमें [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [इब्न नुमैर] ने [अबू खालिद] से सब कुछ बताया है - [अबू बक्र] ने कहा- हमें [अबू खालिद अल अहमर] ने [उबैदुल्लाह] से [नफी] से बताया है उन्होंने कहा; मैंने [इब्न उमर] को अपने हाथ से काला पत्थर रगड़ते देखा, फिर उसके हाथ को चूमा, फिर उन्होंने कहा, "मैंने इसे तब से कभी नहीं छोड़ा जब से मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को ऐसा करते देखा।"