प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1464
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ حَفْصَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْيَا رَسُولَ اللَّهِ مَا شَأْنُ النَّاسِ حَلُّوا بِعُمْرَةٍ وَلَمْ تَحْلِلْ أَنْتَ مِنْ عُمْرَتِكَ قَالَ إِنِّي لَبَّدْتُ رَأْسِي وَقَلَّدْتُ هَدْيِي فَلَا أَحِلُّ حَتَّى أَنْحَرَ
हमसे कहा है [इस्माईल] ने कहा, मुझसे कहा है [मलिक] ने। और यह मनाया भी जाता है। हमें बताया गया है कि [अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने हमें [मलिक] से [नफी] से [इब्न उमर रदियल्लाहु अन्हुमा] से [हफशाह रदियल्लाहु अन्हा] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी से बताया है कि उन्होंने कहा: "ए रसूलुल्लाह, लोगों ने अपने उमराह के लिए तहल्लुल कैसे किया जबकि आपने अपने उमराह से भी तहल्लुल नहीं किया?"। उन्होंने उत्तर दिया: "वास्तव में, मैंने अपने बाल बांध लिए हैं और अपने कुर्बानी के जानवर को चिह्नित कर लिया है और मैं कुर्बानी के जानवर को ज़बह करने के बाद ही तहल्लुल में खड़ा होऊंगा (नहर के दिन)।"