प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 2152
و حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ جَمِيعًا عَنْ الْفَزَارِيِّ قَالَ سَعِيدٌ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ عَنْ غُنَيْمِ بْنِ قَيْسٍ قَالَ سَأَلْتُ سَعْدَ بْنَ أَبِي وَقَّاصٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ الْمُتْعَةِ فَقَالَ فَعَلْنَاهَا وَهَذَا يَوْمَئِذٍ كَافِرٌ بِالْعُرُشِ يَعْنِي بُيُوتَ مَكَّةَ و حَدَّثَنَاه أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَقَالَ فِي رِوَايَتِهِ يَعْنِي مُعَاوِيَةَ و حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ ح و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي خَلَفٍ حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ جَمِيعًا عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَ حَدِيثِهِمَا وَفِي حَدِيثِ سُفْيَانَ الْمُتْعَةُ فِي الْحَجِّ
और हमें [सईद बिन मंशूर] और [इब्न अबू उमर] ने [अल फज़ारी] से सब कुछ बताया है - [सईद] ने कहा- हमें [मरवान बिन मुअविया] ने [सुलेमान अत तैमी] ने [घुनैम बिन कैस] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [सईद बिन अबू वकाश] रदिअल्लाहु अन्हु से मुताह (उमरा) के बारे में पूछा, और उन्होंने उत्तर दिया, "हमने किया है। लेकिन आज मुअविया मक्का के घर में काफ़िर है।" और हमें [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमें [याह्या बिन सईद] ने [सुलेमान अत तैमी] से इस इस्नाद के साथ बताया है, और अपनी रिवायत में उन्होंने कहा; यानी मुअविया। और मुझे बताया है [अमरू अन नकीद] हमें बताया है [अबू अहमद अज़ ज़ुबैरी] हमें बताया है [सुफ़यान] -एक और रिवायत में- और मुझे बताया है [मुहम्मद बिन अबू खलफ़] हमें बताया है [रौह बिन उबादा] हमें [स्यूबा] [सुलेमान अत तैमी] से सब कुछ इस इस्नाद के साथ बताया है, जैसे दूसरी हदीस। और सुफ़यान हदीस में कहा गया है; "अल मुताह फ़िल हाजी (हाजी तमत्तु)।"