प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 4156
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عِمْرَانَ أَبِي بَكْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَأُنْزِلَتْ آيَةُ الْمُتْعَةِ فِي كِتَابِ اللَّهِ فَفَعَلْنَاهَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَمْ يُنْزَلْ قُرْآنٌ يُحَرِّمُهُ وَلَمْ يَنْهَ عَنْهَا حَتَّى مَاتَ قَالَ رَجُلٌ بِرَأْيِهِ مَا شَاءَ
हमें [मुसद्दद] ने बताया है, हमें [याह्या] ने [इमरान अबू बक्र] से बताया है, हमें [अबू राजा] ने [इमरान बिन हुसैन रदलिल्लाहु अन्हुमा] से बताया है, उन्होंने कहा; मुता आयत (हज और उमराह को मिलाकर) अल्लाह की किताब में उतारी गई है, इसलिए हमने भी इसे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ लागू किया, और कुरान ने कोई ऐसी आयत नहीं उतारी जो इसे मना करती हो, और न ही उन्होंने इसे तब तक मना किया जब तक उनकी मृत्यु नहीं हो गई। ताकि कोई अपनी राय में जो चाहे कह सके।