प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1468
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ قَالَ سَمِعْتُ مُجَاهِدًا يَقُولُ حَدَّثَنَا جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاقَالَ قَدِمْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ نَقُولُ لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ بِالْحَجِّ فَأَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَعَلْنَاهَا عُمْرَةً
हमें [मुसद्दद] ने बताया है, हमें [हम्मद बिन ज़ैद] ने [अय्यूब] से कहा; मैंने [मुजाहिद] को कहते सुना; हमें [जाबिर बिन अब्दुल्ला रदलिअल्लाहु अन्हुआ] ने बताया: "हम पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मक्का गए और हमने तल्बियह (इहराम में इरादा) कहा: "लब्बैकल्लाहुम्मा लब्बैका बिलहज्ज" (हे अल्लाह, हम हज के लिए इहराम करने के आपके बुलावे को पूरा करते हैं)। तो फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें आदेश दिया, तो हमने इसे 'उमरा' के लिए इहराम के रूप में बनाया।"