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Makan dan minum hingga ibnu ummi maktum mengumandangkan adzan subuh
Imam Tirmidzi : 187حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ فَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتَّى تَسْمَعُوا تَأْذِينَ ابْنِ أُمِّ مَكْتُومٍقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ وَعَائِشَةَ وَأُنَيْسَةَ وَأَنَسٍ وَأَبِي ذَرٍّ وَسَمُرَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عُمَرَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الْأَذَانِ بِاللَّيْلِ فَقَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ إِذَا أَذَّنَ الْمُؤَذِّنُ بِاللَّيْلِ أَجْزَأَهُ وَلَا يُعِيدُ وَهُوَ قَوْلُ مَالِكٍ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ إِذَا أَذَّنَ بِلَيْلٍ أَعَادَ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَرَوَى حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ بِلَالًا أَذَّنَ بِلَيْلٍ فَأَمَرَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُنَادِيَ إِنَّ الْعَبْدَ نَامَ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَيْرُ مَحْفُوظٍ وَالصَّحِيحُ مَا رَوَى عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ وَغَيْرُهُ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ فَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتَّى يُؤَذِّنَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ وَرَوَى عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي رَوَّادٍ عَنْ نَافِعٍ أَنَّ مُؤَذِّنًا لِعُمَرَ أَذَّنَ بِلَيْلٍ فَأَمَرَهُ عُمَرُ أَنْ يُعِيدَ الْأَذَانَ وَهَذَا لَا يَصِحُّ أَيْضًا لِأَنَّهُ عَنْ نَافِعٍ عَنْ عُمَرَ مُنْقَطِعٌ وَلَعَلَّ حَمَّادَ بْنَ سَلَمَةَ أَرَادَ هَذَا الْحَدِيثَ وَالصَّحِيحُ رِوَايَةُ عُبَيْدِ اللَّهِ وَغَيْرِ وَاحِدٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَالزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَلَوْ كَانَ حَدِيثُ حَمَّادٍ صَحِيحًا لَمْ يَكُنْ لِهَذَا الْحَدِيثِ مَعْنًى إِذْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ فَإِنَّمَا أَمَرَهُمْ فِيمَا يُسْتَقْبَلُ و قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ وَلَوْ أَنَّهُ أَمَرَهُ بِإِعَادَةِ الْأَذَانِ حِينَ أَذَّنَ قَبْلَ طُلُوعِ الْفَجْرِ لَمْ يَقُلْ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ قَالَ عَلِيُّ بْنُ الْمَدِينِيِّ حَدِيثُ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَيْرُ مَحْفُوظٍ وَأَخْطَأَ فِيهِ حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [कुतैबा] कहलक; हमरा सब के [अल लैतस] के [इब्न शिहाब] स [सलीम] स [अपन पिता] स कहने छथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'वास्तव में जखन राति में नमाज के आह्वान होइत अछि तखन अहाँ सब के खाइत रहबाक चाही जा धरि इब्न उम्मी मक्तुम के नमाज के आह्वान नै सुनब'। अबू ईसा कहलनि; 'एहि अध्याय मे इब्न मसूद, 'ऐसिया, उनैसा, अनस, अबू ज़ार आ समराह' सँ सेहो इतिहास अछि | अबू ईसा कहलनि; इब्न उमर के हदीस हसन प्रामाणिक अछि। आ राति मे नमाज के आह्वान पर विद्वान लोकनिक मतभेद अछि | किछु गोटे कहलनि जे जँ कोनो मुअज्जिन राति मे नमाज के आह्वान करैत छथि तखन त' से काफी अछि आ एकरा दोहराबय के कोनो जरूरत नहिं'. ई राय मलिक, बिन अल मुबारक, अहमद आ इशाक केने छल । एम्हर किछु आओर विद्वान कहलनि जे, 'राति मे नमाज के आह्वान करब त' दोहराबय पड़त'। ई राय सुफियन अत्स त्सौरी द्वारा लेल गेल छल | हम्मद बिन सलामाह अय्यूब स, इब्न उमर स नाफी स रिवायत छथि जे बिलाल एक बेर राति मे नमाज के आह्वान केने छलाह, ताहि लेल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका आदेश देलथि जे ओ कहथि जे सचमुच एकटा नौकर सुति गेल अछि। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस सही नहि अछि।' लेकिन जे प्रामाणिक छै, वू छै [उबैदुल्लाह बिन उमर] द्वारा बतैलऽ गेलऽ हदीस आरू एकरऽ अलावा [नफी’] स॑ [इब्न उमर] स॑ जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै; 'सत्ते बिलाल राति मे नमाज के आह्वान करैत छथि, तेँ अहाँ केँ ता धरि खाइत-पीबैत रहबाक चाही जा धरि इब्न उम्मी मकतुम केर नमाज केर आह्वान नहि सुनब'। इहो रिवायत भेल अछि जे नाफी’ सँ अब्दुल अजीज बिन अबू रववाद, जे फोन करय वाला उमर एक बेर राति मे नमाज के आह्वान केने छलाह, ताहि लेल हुनका दोहराबय के आदेश देलखिन्ह, मुदा ई हदीस सेहो अमान्य अछि. कारण नाफी आ उमर के बीच सनाद टूटि गेल छल। शायद हम्मद बिन सलामा के ई हदीस चाही छल। सच्चाई ई हदीस छै जे उबैदुल्लाह आरू अन्य लोगऽ न॑ इब्न उमर स॑ नाफी’ स॑, आरू सलीम बिन उमर स॑ अज़ ज़ुहरी न॑ बतैन॑ छै कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि ‘वास्तव म॑ बिलाल वू समय म॑ नमाज के आह्वान करै छै जब॑ अखनी भी रात होय छै’ । अबू ईसा कहलनि; 'जँ हम्मद द्वारा बखान कएल गेल हदीस प्रामाणिक अछि तँ अवश्य एहि हदीसक कोनो अर्थ नहि अछि ।' कारण रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘सत्ते बिलाल अदान एखनो राति मे छथि,’ ओ सहाबा सभ केँ किछु आबय लेल आदेश देलनि। आ कहलखिन: 'सत्ते बिलाल तखन नमाज के आह्वान करैत छथि जखन कि राति रहैत अछि,' जँ ओ भोर सँ पहिने जखन नमाज के आह्वान कयल गेल छल तखन नमाज के आह्वान दोहराबय के आदेश दैतथि त नबी ई नहि कहितथि जे 'सत्ते बिलाल तखन नमाज के आह्वान करैत छथि जखन कि राति एखनो अछि'। अली बिन अल मदीनी कहलनि; 'हम्मद बिन सलामा के हदीस अय्यूब स, नाफी स', इब्न उमर स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स हदीस सही नै अछि, आ हम्मद बिन सलामा स एहि मे गलती केलक'।