प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 582
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ فَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتَّى يُنَادِيَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ ثُمَّ قَالَ وَكَانَ رَجُلًا أَعْمَى لَا يُنَادِي حَتَّى يُقَالَ لَهُ أَصْبَحْتَ أَصْبَحْتَ
हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] को [मलिक] से [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से [उनके पिता] से बताया गया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बेशक, बिलाल ने रात में ही अज़ान दी, इसलिए तब तक खाओ और पियो जब तक तुम इब्न उम्मी मकतूम की अज़ान न सुन लो।" कथावाचक ने कहा, "इब्न उम्मी मकतूम एक अंधे दोस्त थे, वह तब तक अज़ान (सुबह) नहीं देते थे जब तक कोई उनसे न कहे, 'सुबह हो गई है, सुबह हो गई है'।"