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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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हदीस खोज परिणाम :
कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 582

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ بِلَالًا يُؤَذِّنُ بِلَيْلٍ فَكُلُوا وَاشْرَبُوا حَتَّى يُنَادِيَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ ثُمَّ قَالَ وَكَانَ رَجُلًا أَعْمَى لَا يُنَادِي حَتَّى يُقَالَ لَهُ أَصْبَحْتَ أَصْبَحْتَ

हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] को [मलिक] से [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से [उनके पिता] से बताया गया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बेशक, बिलाल ने रात में ही अज़ान दी, इसलिए तब तक खाओ और पियो जब तक तुम इब्न उम्मी मकतूम की अज़ान न सुन लो।" कथावाचक ने कहा, "इब्न उम्मी मकतूम एक अंधे दोस्त थे, वह तब तक अज़ान (सुबह) नहीं देते थे जब तक कोई उनसे न कहे, 'सुबह हो गई है, सुबह हो गई है'।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 4323, 4948, 5033, 5064, 5167, 5241, 5588, 5777, 5778, 23039, 23138, 26168, 26170
इमाम बुखारी : 582, 585, 587, 1785, 2462, 6707
इमाम मुस्लिम : 1827, 1828, 1829
इमाम तिर्मिदज़ी : 187
इमाम नसाई : 633, 634, 635
इमाम मलिक : 147, 148
इमाम दरिमी : 1164, 1165