प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 1702
و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَابْنُ نُمَيْرٍ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ جَمِيعًا عَنْ حَفْصِ بْنِ غِيَاثٍ قَالَ ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا حَفْصٌ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدٍ عَنْ عُمَيْرٍ مَوْلَى آبِي اللَّحْمِ قَالَ كُنْتُ مَمْلُوكًا فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَأَتَصَدَّقُ مِنْ مَالِ مَوَالِيَّ بِشَيْءٍ قَالَ نَعَمْ وَالْأَجْرُ بَيْنَكُمَا نِصْفَانِ
और हमें [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [इब्न नुमैर] और [ज़ुहैर बिन हर्ब] ने [हफ़्श बिन ग़ियात्स] से सब कुछ बताया है - [इब्न नुमैर] ने कहा- हमें [हफ़्श] ने [मुहम्मद बिन ज़ैद] से [उमैर] मौला अबू लहम से बताया है, उन्होंने कहा; जब मैं अभी भी एक गुलाम था, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा, "क्या मैं अपने मालिक की संपत्ति दान कर सकता हूं?" उन्होंने उत्तर दिया: "हां, आप कर सकते हैं, और इनाम आप दोनों के बीच आधा-आधा विभाजित किया जाएगा।"