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Anjuran mengucapkan doa yang baik ketika menjenguk orang sakit atau orang yang meninggal: ALLAHUMMAGHFIR LII WA LAHU WA`A'QIBNII MINHU UQBAA HASANAH
Imam Tirmidzi : 899حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ قَالَتْقَالَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا حَضَرْتُمْ الْمَرِيضَ أَوْ الْمَيِّتَ فَقُولُوا خَيْرًا فَإِنَّ الْمَلَائِكَةَ يُؤَمِّنُونَ عَلَى مَا تَقُولُونَ قَالَتْ فَلَمَّا مَاتَ أَبُو سَلَمَةَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَبَا سَلَمَةَ مَاتَ قَالَ فَقُولِيَ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَلَهُ وَأَعْقِبْنِي مِنْهُ عُقْبَى حَسَنَةً قَالَتْ فَقُلْتُ فَأَعْقَبَنِي اللَّهُ مِنْهُ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنْهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَشَقِيقٌ هُوَ ابْنُ سَلَمَةَ أَبُو وَائِلٍ الْأَسَدِيُّ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أُمِّ سَلَمَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ كَانَ يُسْتَحَبُّ أَنْ يُلَقَّنَ الْمَرِيضُ عِنْدَ الْمَوْتِ قَوْلَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ إِذَا قَالَ ذَلِكَ مَرَّةً فَمَا لَمْ يَتَكَلَّمْ بَعْدَ ذَلِكَ فَلَا يَنْبَغِي أَنْ يُلَقَّنَ وَلَا يُكْثَرَ عَلَيْهِ فِي هَذَا وَرُوِيَ عَنْ ابْنِ الْمُبَارَكِ أَنَّهُ لَمَّا حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ جَعَلَ رَجُلٌ يُلَقِّنُهُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَكْثَرَ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ إِذَا قُلْتُ مَرَّةً فَأَنَا عَلَى ذَلِكَ مَا لَمْ أَتَكَلَّمْ بِكَلَامٍ وَإِنَّمَا مَعْنَى قَوْلِ عَبْدِ اللَّهِ إِنَّمَا أَرَادَ مَا رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَانَ آخِرُ قَوْلِهِ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ دَخَلَ الْجَنَّةَ
हमरा सब [हन्नाद] के कहलक अछि, हमरा सब के [अबू मुअवियाह] स [अल अ'मासी] स [स्याकिक] स [उमू सलामाह] स कहलक अछि; अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि अगर आपने कोनो बीमार या कोय व्यक्ति के पास आबै छै जे मौत के करीब छै, त॑ अच्छा शब्द बोलऽ । कारण अहाँक कहब सँ एन्जिल्स सहमत छथि'। -उम्म सलामाह- कहलक; 'जखन अबू सलामाह के मृत्यु भ गेलैन त हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट केलौं, आ कहलौं; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अबू सलामा के मृत्यु भ गेलैन'। ओ कहलनि: 'कहब: 'अल्लाहुम्माघफिरली वा लाहू वा अ'किबनी मिन्हू उक्बा हसनाह -हे अल्लाह, हमरा आ हुनका माफ करू, आ हुनका बाद हमरा एकटा नीक बदलाव दिअ-''। -उम्म सलामाह- कहलक; 'हम पढ़लहुँ, तखन अल्लाह हमरा हुनका बाद एकटा नीक उत्तराधिकारी देलनि, अर्थात अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम'। स्याकिक इब्न सलामाह, अबू व`इल अल असदी छैथ। अबू ईसा कहलनि; 'उमू सलाह के हदीस हसन सहीह हदीस छै।' बीमार व्यक्ति के मरय वाला के मेन्टकीन पढ़ना सुन्नत छै, जेकरा में ला इलाहा इल्लाल्लाह वाक्य छै। किछु विद्वान कहैत छथि; 'जँ बीमार एक बेर कहने अछि, तखन चुप भ' जाइत अछि आ दोसर वाक्य नहि बजैत अछि त' ओकरा फेर सँ पाठ नहि करबाक चाही'। एहि मामला मे इब्न मुबारक स रिवायत अछि जखन सकारोतुल मउत हुनका लग आयल छल । एक आदमी अपन मेन्टलकिन पढ़लक आ दोहरौलक, तखन अब्दुल्ला कहलक; 'जँ एक बेर कहने छी तखन जा धरि दोसर वाक्य नहि कहब ता धरि वाक्यक संग मरि जायब'। अब्दुल्ला केरऽ वचन केरऽ मतलब वू छै जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ रिवायत करलऽ गेलऽ छै: "जे अपनऽ बात - ई दुनिया म॑ - ला इलाहा इल्लाह शब्दऽ स॑ समाप्त करी दै छै, वू निश्चित रूप स॑ स्वर्ग म॑ प्रवेश करतै।"