प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 4205
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا مَعْنُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ مَخْرَمَةَ بْنِ سُلَيْمَانَ عَنْ كُرَيْبٍ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُأَنَّهُ بَاتَ عِنْدَ مَيْمُونَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهْيَ خَالَتُهُ قَالَ فَاضْطَجَعْتُ فِي عَرْضِ الْوِسَادَةِ وَاضْطَجَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَهْلُهُ فِي طُولِهَا فَنَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى انْتَصَفَ اللَّيْلُ أَوْ قَبْلَهُ بِقَلِيلٍ أَوْ بَعْدَهُ بِقَلِيلٍ ثُمَّ اسْتَيْقَظَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَعَلَ يَمْسَحُ النَّوْمَ عَنْ وَجْهِهِ بِيَدَيْهِ ثُمَّ قَرَأَ الْعَشْرَ الْآيَاتِ الْخَوَاتِمَ مِنْ سُورَةِ آلِ عِمْرَانَ ثُمَّ قَامَ إِلَى شَنٍّ مُعَلَّقَةٍ فَتَوَضَّأَ مِنْهَا فَأَحْسَنَ وُضُوءَهُ ثُمَّ قَامَ يُصَلِّي فَصَنَعْتُ مِثْلَ مَا صَنَعَ ثُمَّ ذَهَبْتُ فَقُمْتُ إِلَى جَنْبِهِ فَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ الْيُمْنَى عَلَى رَأْسِي وَأَخَذَ بِأُذُنِي بِيَدِهِ الْيُمْنَى يَفْتِلُهَا فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ أَوْتَرَ ثُمَّ اضْطَجَعَ حَتَّى جَاءَهُ الْمُؤَذِّنُ فَقَامَ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ خَفِيفَتَيْنِ ثُمَّ خَرَجَ فَصَلَّى الصُّبْحَ
हमें [अली बिन अब्दुल्ला] ने बताया है कि हमें [मान बिन ईसा] ने बताया है कि हमें [मखराम बिन सुलेमान] ने [कुरैब] से - मुक्त दास- अब्दुल्ला बिन अब्बास से बताया है कि [अब्दुल्ला बिन अब्बास] ने उनसे कहा कि वह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नी मैमूना, अर्थात् उनकी चाची के घर में रह रहे थे। उन्होंने कहा; मैं तकिये के चौड़े हिस्से पर लेटा था, जबकि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनका परिवार तकिये के लंबे हिस्से पर सोए थे। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आधी रात तक सोए रहे, थोड़ा या उससे थोड़ा अधिक, फिर उठे और अपने हाथों से अपने चेहरे से नींद पोंछते हुए बैठ गए। फिर उसने अली इमरान के खत की आखिरी दस आयतें पढ़ीं, फिर उठकर लटके हुए गेरिबा के पास गया, उससे वुज़ू किया और वुज़ू पूरा किया फिर नमाज़ पढ़ी। इब्न अब्बास ने कहा; मैं उठा और वही किया जो उसने किया, फिर मैं उसके बगल में खड़ा हो गया, फिर उसने अपना हाथ मेरे सिर पर रखा और मेरा दाहिना कान पकड़कर मरोड़ दिया। उसने दो रकात, दो रकात, दो रकात, दो रकात, दो रकात, दो रकात पढ़ी फिर उसने वित्र पढ़ी, खत्म करने के बाद वह वापस सो गया जब तक कि मुअज़्ज़िन का बुलावा नहीं आया। फिर उसने दो हल्की रकात पढ़ीं और फ़ज्र की नमाज़ पढ़ने के लिए बाहर चला गया।