प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1851
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ سُفْيَانَ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ قُلْتُ لِعَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَاهَلْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْتَصُّ مِنْ الْأَيَّامِ شَيْئًا قَالَتْ لَا كَانَ عَمَلُهُ دِيمَةً وَأَيُّكُمْ يُطِيقُ مَا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُطِيقُ
मुसद्दद ने हमें बताया है, याह्या ने सुफ़यान से, मंसूर से, इब्राहिम से, अलक़मा से; मैंने पूछा कि क्या अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दान के लिए कुछ दिन तय किए हैं? उन्होंने जवाब दिया: नहीं। उन्होंने हमेशा बिना रुके दान दिया। तुम में से कौन वह कर पाएगा जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कर पाए?