प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 282
و حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ دُكَيْنٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ يَعْنِي مُحَمَّدَ بْنَ أَبِي أَيُّوبَ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ الْفَقِيرُ قَالَ كُنْتُ قَدْ شَغَفَنِي رَأْيٌ مِنْ رَأْيِ الْخَوَارِجِ فَخَرَجْنَا فِي عِصَابَةٍ ذَوِي عَدَدٍ نُرِيدُ أَنْ نَحُجَّ ثُمَّ نَخْرُجَ عَلَى النَّاسِ قَالَ فَمَرَرْنَا عَلَى الْمَدِينَةِ فَإِذَا جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ يُحَدِّثُ الْقَوْمَ جَالِسٌ إِلَى سَارِيَةٍ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَإِذَا هُوَ قَدْ ذَكَرَ الْجَهَنَّمِيِّينَ قَالَ فَقُلْتُ لَهُ يَا صَاحِبَ رَسُولِ اللَّهِ مَا هَذَا الَّذِي تُحَدِّثُونَ وَاللَّهُ يَقُولُ { إِنَّكَ مَنْ تُدْخِلْ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ } وَ { كُلَّمَا أَرَادُوا أَنْ يَخْرُجُوا مِنْهَا أُعِيدُوا فِيهَا } فَمَا هَذَا الَّذِي تَقُولُونَ قَالَ فَقَالَ أَتَقْرَأُ الْقُرْآنَ قُلْتُ نَعَمْ قَالَ فَهَلْ سَمِعْتَ بِمَقَامِ مُحَمَّدٍ عَلَيْهِ السَّلَام يَعْنِي الَّذِي يَبْعَثُهُ اللَّهُ فِيهِ قُلْتُ نَعَمْ قَالَ فَإِنَّهُ مَقَامُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَحْمُودُ الَّذِي يُخْرِجُ اللَّهُ بِهِ مَنْ يُخْرِجُ قَالَ ثُمَّ نَعَتَ وَضْعَ الصِّرَاطِ وَمَرَّ النَّاسِ عَلَيْهِ قَالَ وَأَخَافُ أَنْ لَا أَكُونَ أَحْفَظُ ذَاكَ قَالَ غَيْرَ أَنَّهُ قَدْ زَعَمَ أَنَّ قَوْمًا يَخْرُجُونَ مِنْ النَّارِ بَعْدَ أَنْ يَكُونُوا فِيهَا قَالَ يَعْنِي فَيَخْرُجُونَ كَأَنَّهُمْ عِيدَانُ السَّمَاسِمِ قَالَ فَيَدْخُلُونَ نَهَرًا مِنْ أَنْهَارِ الْجَنَّةِ فَيَغْتَسِلُونَ فِيهِ فَيَخْرُجُونَ كَأَنَّهُمْ الْقَرَاطِيسُ فَرَجَعْنَا قُلْنَا وَيْحَكُمْ أَتُرَوْنَ الشَّيْخَ يَكْذِبُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَرَجَعْنَا فَلَا وَاللَّهِ مَا خَرَجَ مِنَّا غَيْرُ رَجُلٍ وَاحِدٍ أَوْ كَمَا قَالَ أَبُو نُعَيْمٍ
और [हज्जाज बिन अश-सयार] ने हमें बताया है [अल-फ़दल बिन दुकैन] ने हमें बताया है [अबू आशिम] - यानी मुहम्मद बिन अबू अय्यूब - उन्होंने कहा, [यज़ीद अल-फ़कीर] ने मुझे बताया है उन्होंने कहा, "मैं ख़वारिज के विचारों से प्रभावित था, फिर हम एक बड़े समूह में हज करने के लिए निकले। जब हम निकले और मदीना से गुज़रे, तो पता चला कि [जाबिर बिन अब्दुल्ला] एक खंभे पर झुककर लोगों को अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीस सुना रहे थे।" यज़ील अल-फ़कीर ने फिर कहा, "अचानक उन्होंने अल-जहन्नामिय्यिन का ज़िक्र किया।" तो मैंने उनसे कहा, 'ऐ अल्लाह के रसूल के साथी, यह तुम क्या कह रहे हो! जबकि अल्लाह कहता है: '(बेशक, जिसे तुमने आग में डाला, तुमने उसे सचमुच अपमानित किया है)' (क़ुस. अली इमरान: 192), और आयत है: '(जब भी वे इससे बाहर निकलना चाहेंगे, वे इसमें लौट आएंगे)' (क़ुस. अस-सजदा: 20)। तुम क्या कह रहे हो?' जाबिर ने कहा, 'क्या तुमने कुरान पढ़ा है?' हमने कहा, 'हां।' जाबिर ने फिर पूछा, 'क्या तुमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का दर्जा सुना है, यानी वह सिफ़ारिश करने वाला जिसके साथ अल्लाह ने उन्हें भेजा था?' मैंने कहा, 'हां।' जबिर ने तब कहा, 'तो यह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का दर्जा है, जो प्रशंसनीय हैं, जिसके द्वारा अल्लाह उन लोगों को निकालता है जिन्हें वह (आग से) निकालता है।' यज़ीद ने कहा, 'फिर जाबिर ने सीरत बिछाकर दिखाया, और लोग उसके ऊपर से गुज़रे।' यज़ीद ने कहा, 'और मुझे बहुत डर था कि मैं इससे बच नहीं पाऊँगा। लेकिन, जाबिर को यकीन था कि कुछ लोग कुछ समय वहाँ रहने के बाद ज़रूर जहन्नुम से बाहर आएँगे।' जाबिर ने कहा, 'उसका मतलब है कि वे काले कोयले की लकड़ियों की तरह बाहर आएँगे।' जाबिर ने आगे कहा, 'फिर वे जन्नत की किसी नदी में घुस जाएँगे, उसमें नहाएँगे, और (सफ़ेद) कागज़ की तरह बाहर आएँगे, और हम वापस चले जाएँगे।' हमने कहा, 'हाय रे, क्या तुम्हें लगता है कि यह शेख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) के बारे में झूठ बोल रहा है?' हम वापस चले गए, और अल्लाह की कसम, हममें से कोई नहीं निकला सिवाय एक आदमी के, या जैसा अबू नईम ने कहा।'