प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 270
و حَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الْأَيْلِيُّ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى بْنِ عُمَارَةَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يُدْخِلُ اللَّهُ أَهْلَ الْجَنَّةِ الْجَنَّةَ يُدْخِلُ مَنْ يَشَاءُ بِرَحْمَتِهِ وَيُدْخِلُ أَهْلَ النَّارِ النَّارَ ثُمَّ يَقُولُ انْظُرُوا مَنْ وَجَدْتُمْ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ فَأَخْرِجُوهُ فَيُخْرَجُونَ مِنْهَا حُمَمًا قَدْ امْتَحَشُوا فَيُلْقَوْنَ فِي نَهَرِ الْحَيَاةِ أَوْ الْحَيَا فَيَنْبُتُونَ فِيهِ كَمَا تَنْبُتُ الْحِبَّةُ إِلَى جَانِبِ السَّيْلِ أَلَمْ تَرَوْهَا كَيْفَ تَخْرُجُ صَفْرَاءَ مُلْتَوِيَةً و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ ح و حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا خَالِدٌ كِلَاهُمَا عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَقَالَا فَيُلْقَوْنَ فِي نَهَرٍ يُقَالَ لَهُ الْحَيَاةُ وَلَمْ يَشُكَّا وَفِي حَدِيثِ خَالِدٍ كَمَا تَنْبُتُ الْغُثَاءَةُ فِي جَانِبِ السَّيْلِ وَفِي حَدِيثِ وُهَيْبٍ كَمَا تَنْبُتُ الْحِبَّةُ فِي حَمِئَةٍ أَوْ حَمِيلَةِ السَّيْلِ
और मुझे बताया है [हारुन बिन सईद अल-आइली] ने हमें बताया है [इब्नु वहब] ने कहा, हमें बताया है [मलिक बिन अनस] ने [अमरू बिन यह्या बिन उमरा] से उन्होंने कहा, मुझे [मेरे पिता] ने [अबू सईद अल-खुदरी] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अल्लाह स्वर्ग के लोगों को स्वर्ग में प्रवेश करता है, वह अपनी दया से जिसे चाहता है शामिल करता है, और नरक के लोगों को नरक में भेजता है। फिर अल्लाह ने कहा: 'अपने आप को देखो, जो कोई भी तुम उनमें से पाओ उसके दिल में विश्वास का सरसों का दाना है, तो उसे निकाल लो।' फिर उन्हें जली हुई हालत में जहन्नम से बाहर निकाला गया। उन्हें जलाया गया, फिर उन्हें ज़िंदगी की नदी में फेंक दिया गया। फिर वे ऐसे उगे जैसे बीज झाग के किनारे उगते हैं। और हमें बताया है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमें बताया है [अफ़्फ़ान] ने हमें बताया है [वुहैब]। (एक और रिवायत में इसका ज़िक्र है) और हमें बताया है [हज्जाज बिन अश-सय्यर] ने हमें बताया है [अम्र बिन औन] ने हमें बताया है [खालिद] दोनों ने [अमरू बिन यह्या] से इस इस्नाद के साथ रिवायत किया, और दोनों ने कहा, "फिर उन्हें उस नदी में फेंक दिया गया जिसे ज़िंदगी की नदी कहा जाता है।" और उनमें से कोई भी हिचकिचाया नहीं। और खालिद की हदीस में है, "जैसे बीज झाग के पास उगते हैं।" और वुहैब हदीस में है, "जैसे बीज बाढ़ के झाग में उगते हैं।"