हदीस
Memberi makan miskin tak bermanfaat tanpa doa ampunan (Ibn Jad'an)
Imam Muslim : 315حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ عَنْ دَاوُدَ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ ابْنُ جُدْعَانَ كَانَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ يَصِلُ الرَّحِمَ وَيُطْعِمُ الْمِسْكِينَ فَهَلْ ذَاكَ نَافِعُهُ قَالَ لَا يَنْفَعُهُ إِنَّهُ لَمْ يَقُلْ يَوْمًا رَبِّ اغْفِرْ لِي خَطِيئَتِي يَوْمَ الدِّينِ
हमरा के बतावल गइल बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमनी के [हफस बिन घियात] [दाऊद] से [अश-स्याबी] से [मसरुक] से [ऐसिया] से बतवले बाड़न उ कहले बाड़न कि, ‘हम कहले रहनी कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इब्न जुद’न -उनकर रिश्तेदार- जहिलिय्याह के समय में हमेशा संपर्क में रहले आ गरीबन के खाना खियावत रहले। का एकरा से ओकरा कवनो फायदा होला? ' ऊ जवाब दिहले : 'ना। एकरा से ओकरा कवनो फायदा नईखे, काहेकी उ इ नईखन कहले कि, 'हे प्रभु, हमरा के क़यामत के दिन हमार अपराध माफ क दिही''।