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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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प्रतिनिधि हदीस
इमाम नसाई : 447

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ عَنْ الزُّبَيْرِ بْنِ عَدِيٍّ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ مُصَرِّفٍ عَنْ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَلَمَّا أُسْرِيَ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ انْتُهِيَ بِهِ إِلَى سِدْرَةِ الْمُنْتَهَى وَهِيَ فِي السَّمَاءِ السَّادِسَةِ وَإِلَيْهَا يَنْتَهِي مَا عُرِجَ بِهِ مِنْ تَحْتِهَا وَإِلَيْهَا يَنْتَهِي مَا أُهْبِطَ بِهِ مِنْ فَوْقِهَا حَتَّى يُقْبَضَ مِنْهَا قَالَ{ إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَى }قَالَ فَرَاشٌ مِنْ ذَهَبٍ فَأُعْطِيَ ثَلَاثًا الصَّلَوَاتُ الْخَمْسُ وَخَوَاتِيمُ سُورَةِ الْبَقَرَةِ وَيُغْفَرُ لِمَنْ مَاتَ مِنْ أُمَّتِهِ لَا يُشْرِكُ بِاللَّهِ شَيْئًا الْمُقْحِمَاتُ

हमें [अहमद बिन सुलेमान] ने सूचित किया है; हमें [याह्या बिन आदम] ने बताया है; हमें [मलिक बिन मिघवाल] ने [जुबैर बिन अदी] से [थलहा बिन मुशर्रफ] से [मुर्रा] से [अब्दुल्ला] से बताया है; "जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसरा किया तो वह सिदरतुल मुंतहा पहुँचे, जो छठे आसमान में एक जगह है और यहीं नीचे से उठने वाली हर चीज़ खत्म होती है और वहीं ऊपर से उतरने वाली हर चीज़ भी आती है जब तक उसे पकड़ा न जा सके। फिर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत पढ़ी: "जब सिदरतुल मुंतहा किसी चीज़ से ढक गया जिसने उसे ढक लिया" (क़ुरआन अन-नज्म (53):16) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "(जिसमें सिदरतुल मुंतहा भी शामिल है) सोने की बनी एक तितली है, फिर मुझे तीन चीज़ें दी गईं, यानी पाँच रोज़ की नमाज़ें, सूरह अल बक़रा का अंत, और मेरे लोगों के मरे हुए लोग माफ़ कर दिए गए, जब तक कि उन्होंने अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ला के साथ किसी चीज़ में किसी को साझीदार न बनाया।"

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इमाम मुस्लिम : 252
इमाम नसाई : 447