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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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हदीस खोज परिणाम :
कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 4573

حَدَّثَنَا ابْنُ بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ أَنَّ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْأَوَّلُ مَا بُدِئَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ فَجَاءَهُ الْمَلَكُ فَقَالَ{ اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ خَلَقَ الْإِنْسَانَ مِنْ عَلَقٍ اقْرَأْ وَرَبُّكَ الْأَكْرَمُ }

हमें [इब्न बुकैर] बताया गया है कि हमें [अल लैत्स] [उकैल] से [इब्न शिहाब] से [उरवाह] से बताया गया है कि [आइस्या] रदिअल्लाहु अन्हा ने कहा, "वह घटना जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पहली वह्यी आई, वह अर रूया शालीहा (एक अच्छा सपना) था। अर्थात्, एक फ़रिश्ता उनके पास आया और कहा, 'इक़रा` बिस्मी रब्बिकल लादज़ी ख़लक, ख़लककल इंसाना मिन 'अलक़, इक़रा` वरब्बुकल अकरम।'"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 24046, 24768
इमाम बुखारी : 4573, 4574
इमाम मुस्लिम : 231