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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Nabi Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam Diangkat menjadi Nabi dan turunnya wahyu Ayat Al Quran pertama yang diturunkan

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Ayat Al Quran pertama yang diturunkan
Imam Muslim : 233

و حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ قَالَ سَمِعْتُ يَحْيَى يَقُولُ سَأَلْتُ أَبَا سَلَمَةَ أَيُّ الْقُرْآنِ أُنْزِلَ قَبْلُ قَالَ { يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ } فَقُلْتُ أَوْ اقْرَأْ فَقَالَ سَأَلْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ أَيُّ الْقُرْآنِ أُنْزِلَ قَبْلُ قَالَ { يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ } فَقُلْتُ أَوْ اقْرَأْ قَالَ جَابِرٌ أُحَدِّثُكُمْ مَا حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ جَاوَرْتُ بِحِرَاءٍ شَهْرًا فَلَمَّا قَضَيْتُ جِوَارِي نَزَلْتُ فَاسْتَبْطَنْتُ بَطْنَ الْوَادِي فَنُودِيتُ فَنَظَرْتُ أَمَامِي وَخَلْفِي وَعَنْ يَمِينِي وَعَنْ شِمَالِي فَلَمْ أَرَ أَحَدًا ثُمَّ نُودِيتُ فَنَظَرْتُ فَلَمْ أَرَ أَحَدًا ثُمَّ نُودِيتُ فَرَفَعْتُ رَأْسِي فَإِذَا هُوَ عَلَى الْعَرْشِ فِي الْهَوَاءِ يَعْنِي جِبْرِيلَ عَلَيْهِ السَّلَام فَأَخَذَتْنِي رَجْفَةٌ شَدِيدَةٌ فَأَتَيْتُ خَدِيجَةَ فَقُلْتُ دَثِّرُونِي فَدَثَّرُونِي فَصَبُّوا عَلَيَّ مَاءً فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ قُمْ فَأَنْذِرْ وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ } حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَقَالَ فَإِذَا هُوَ جَالِسٌ عَلَى عَرْشٍ بَيْنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ

आ हमनी के बता के [जुहैर बिन हरब] हमनी के बतवले रहले [अल-वालिद बिन मुस्लिम] हमनी के बतवले रहले [अल-औजाई] उ कहले, हम [याह्या] के कहत सुननी, हम [अबू सलामाह] से पूछनी कि, 'कुरान के कवन आयत पहिले उतारल गईल?' एकरा बाद उ पढ़ले: '-हे लोग जे ढंकल बा-' -सूरत अल मुदतत्सिर-। त हम कहनी कि 'या - शायद कवनो चिट्ठी - इकरा''। तब हम [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से पूछनी कि कुरान के कवन आयत पहिले उतारल गईल? एकरा बाद उ पढ़ले: '-हे लोग जे ढंकल बा-' -सूरत अल मुदतत्सिर-। त हम कहनी कि 'या - शायद कवनो चिट्ठी - इकरा''। जाबिर कहले कि हम तहरा के एगो बात बतवले बानी जवन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के बतवले रहले। उ कहले कि: 'हम आपन इक्तिकाफ हीरा के गुफा में कईनी' एक महीना तक, जब हम आपन इक्तिकाफ खतम क लेले रहनी, फेर नीचे उतरनी, घाटी के तह तक नीचे, फिर हमरा के बोलावल गईल। त हम अपना सामने आ पीछे, दाहिना आ बाईं ओर देखनी, लेकिन केहू ना देखनी, फेर हमरा के फेर से बोलावल गईल, फेर देखनी, लेकिन केहु ना रहे, फेर हमरा के बोलावल गईल, त हम आपन माथा उठवनी, पता चलल कि उ हवा में सिंहासन के ऊपर रहले, यानी जिब्राईल। तब हम असमंजस में पड़ गईनी। फेरु खदीजा गइनी त कहनी कि ढँक दऽ, ढँकऽ! त ऊ हमरा पर पानी डाल दिहलन, तब अल्लाह ई आयत उतार दिहलन: '-हे कफन वाला! जाग के चेतावनी दीं, आ राउर रब्ब तब एकर महिमामंडन करीं, आ राउर कपड़ा तब ओकरा के शुद्ध करीं-' -Qs. अल मुदतत्सिर : 1-4- के बा। हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] हमनी के बतवले बाड़े [उस्मान बिन उमर] हमनी के [अली बिन अल मुबारक] के [याह्या बिन अबू कत्सिर] से एह सनाद से बतवले बाड़े, अवुरी कहले बाड़े कि, 'पता चलल कि उ आकाश अवुरी धरती के बीच के गद्दी प बईठल बाड़े'।

हदीस :

Imam Ahmad : 13769, 14679
Imam Bukhari : 4541, 4543
Imam Muslim : 233