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- Dzikir & Doa Kelanjutan dzikir sore Membaca: ALLAHUMMA INNII AS`ALUKAL 'AAFIYATA FIDDUNYAA WAL AAKHIRAH...

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Membaca: ALLAHUMMA INNII AS`ALUKAL 'AAFIYATA FIDDUNYAA WAL AAKHIRAH...
Imam Abu Dawud : 4412

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى الْبَلْخِيُّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ الْمَعْنَى حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا عُبَادَةُ بْنُ مُسْلِمٍ الْفَزَارِيُّ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ أَبِي سُلَيْمَانَ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ يَقُولُلَمْ يَكُنْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَعُ هَؤُلَاءِ الدَّعَوَاتِ حِينَ يُمْسِي وَحِينَ يُصْبِحُ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي دِينِي وَدُنْيَايَ وَأَهْلِي وَمَالِي اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَتِي وَقَالَ عُثْمَانُ عَوْرَاتِي وَآمِنْ رَوْعَاتِي اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ وَمِنْ خَلْفِي وَعَنْ يَمِينِي وَعَنْ شِمَالِي وَمِنْ فَوْقِي وَأَعُوذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِيقَالَ أَبُو دَاوُد قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي الْخَسْفَ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [याह्या बिन मूसा अल बल्खी] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [वाकी'] कहलक अछि । -एकटा आओर तरहेँ कहल गेल अछि- हमरा सभ केँ [उस्मान बिन अबू स्याइबा] केँ अर्थ मे कहलक अछि, कहलक अछि, हमरा सभ केँ [इब्नु नुमैर] दुनू कहलनि; हमरा सब [उबादा बिन मुस्लिम अल फजारी] के [जुबैर बिन सुलेमान बिन जुबैर बिन मुथइम] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [इब्न उमर] के कहैत सुनलहुं जे, 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम पहिने कहियो ई नमाज के त्याग नहि केने छथि जखन कि साँझ आ भोर के बात अबैत अछि: 'अल्लाहुम्मा इन्नी अस'अलुकल 'आफियाता फिद्दुन्या वाल अखिराह अल्लाहुम्मा इन्नी अस`अलुकल 'अफवा वाल 'आफियाता फिनिनी वा दुन्याया वा अहली वा माली अल्लाहुमस्तूर 'औराती -उस्मान ने लाफज में कहा- ''औराती वा आम रौ'आती अल्लाहुम्महफद्झ्नी मिन बैनी याद्या वा निन खलफी वा 'एन यमीनी वा 'एन सिमाली वा मिन फौकी वा अ'ऊदज़ू बिअझमतिका आन उघताला मैंन तहती -हे अल्लाह, हम अहाँ स एहि दुनिया आ परलोक मे सुरक्षा मांगैत छी। हे अल्लाह, हम अहाँ स धर्म, सांसारिक जीवन, परिवार, आ धन मे माफी आ सुरक्षा मांगैत छी। हे अल्लाह हमर निजी अंग के ढक दियौ, -उस्मान वाक्यांश में कहलनि- 'हमर निजी अंग के, आ हमरा डर स सुरक्षित करू।' हे अल्लाह हमरा आगू स, पाछू स, दहिना कात स, बामा कात स, आ ऊपर स बचाउ। हम अहाँक महानता सँ अहाँक शरण लैत छी जाहि सँ हमरा पर नीचाँ सँ आक्रमण नहि हो।' अबू दाऊद कहलकै, 'वाकी' कहलकै, 'एकर मतलब छै डूबना।'

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