हदीस
Nabi mengangkat kedua tangannya ketika masuk shalat, yaitu bertakbir
Imam Nasa'i : 1076أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْكُوفِيُّ الْمُحَارِبِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلَاةَ وَإِذَا رَكَعَ وَإِذَا رَفَعَ وَكَانَ لَا يَفْعَلُ ذَلِكَ فِي السُّجُودِ
हमनी के [मुहम्मद बिन उबैद अल कुफी अल मुहरीबी] के रिपोर्ट कईला के बाद उ कहले कि; हमनी के [इब्नुल मुबारक] के [मा'मार] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [इब्न उमर] से बतवले बाड़े उ कहले कि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब नमाज पढ़े खातिर खड़ा भइले त दुनु हाथ उठवले। ओइसहीं प्रणाम करत घरी आ प्रणाम से सिर उठावत घरी, बाकिर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सजदा करत घरी अइसन ना कइलन.