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- Shalat Wajib dan Sunnah Rukun dan Gerakan shalat beserta bacaannya Doa dalam tahiyyat - 10: ALLAHUMMA A'IDZHU MIN 'ADZAABILQABRI

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Doa dalam tahiyyat - 10: ALLAHUMMA A'IDZHU MIN 'ADZAABILQABRI
Imam Abu Dawud : 4127

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ ح و حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَهَذَا لَفْظُ هَنَّادٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ الْمِنْهَالِ عَنْ زَاذَانَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَخَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي جَنَازَةِ رَجُلٍ مِنْ الْأَنْصَارِ فَانْتَهَيْنَا إِلَى الْقَبْرِ وَلَمَّا يُلْحَدْ فَجَلَسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَجَلَسْنَا حَوْلَهُ كَأَنَّمَا عَلَى رُءُوسِنَا الطَّيْرُ وَفِي يَدِهِ عُودٌ يَنْكُتُ بِهِ فِي الْأَرْضِ فَرَفَعَ رَأْسَهُ فَقَالَ اسْتَعِيذُوا بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ مَرَّتَيْنِ أَوْ ثَلَاثًا زَادَ فِي حَدِيثِ جَرِيرٍ هَاهُنَا وَقَالَ وَإِنَّهُ لَيَسْمَعُ خَفْقَ نِعَالِهِمْ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ حِينَ يُقَالُ لَهُ يَا هَذَا مَنْ رَبُّكَ وَمَا دِينُكَ وَمَنْ نَبِيُّكَ قَالَ هَنَّادٌ قَالَ وَيَأْتِيهِ مَلَكَانِ فَيُجْلِسَانِهِ فَيَقُولَانِ لَهُ مَنْ رَبُّكَ فَيَقُولُ رَبِّيَ اللَّهُ فَيَقُولَانِ لَهُ مَا دِينُكَ فَيَقُولُ دِينِيَ الْإِسْلَامُ فَيَقُولَانِ لَهُ مَا هَذَا الرَّجُلُ الَّذِي بُعِثَ فِيكُمْ قَالَ فَيَقُولُ هُوَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَيَقُولَانِ وَمَا يُدْرِيكَ فَيَقُولُ قَرَأْتُ كِتَابَ اللَّهِ فَآمَنْتُ بِهِ وَصَدَّقْتُ زَادَ فِي حَدِيثِ جَرِيرٍ فَذَلِكَ قَوْلُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ{ يُثَبِّتُ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا }الْآيَةُ ثُمَّ اتَّفَقَا قَالَ فَيُنَادِي مُنَادٍ مِنْ السَّمَاءِ أَنْ قَدْ صَدَقَ عَبْدِي فَأَفْرِشُوهُ مِنْ الْجَنَّةِ وَافْتَحُوا لَهُ بَابًا إِلَى الْجَنَّةِ وَأَلْبِسُوهُ مِنْ الْجَنَّةِ قَالَ فَيَأْتِيهِ مِنْ رَوْحِهَا وَطِيبِهَا قَالَ وَيُفْتَحُ لَهُ فِيهَا مَدَّ بَصَرِهِ قَالَ وَإِنَّ الْكَافِرَ فَذَكَرَ مَوْتَهُ قَالَ وَتُعَادُ رُوحُهُ فِي جَسَدِهِ وَيَأْتِيهِ مَلَكَانِ فَيُجْلِسَانِهِ فَيَقُولَانِ لَهُ مَنْ رَبُّكَ فَيَقُولُ هَاهْ هَاهْ هَاهْ لَا أَدْرِي فَيَقُولَانِ لَهُ مَا دِينُكَ فَيَقُولُ هَاهْ هَاهْ لَا أَدْرِي فَيَقُولَانِ مَا هَذَا الرَّجُلُ الَّذِي بُعِثَ فِيكُمْ فَيَقُولُ هَاهْ هَاهْ لَا أَدْرِي فَيُنَادِي مُنَادٍ مِنْ السَّمَاءِ أَنْ كَذَبَ فَأَفْرِشُوهُ مِنْ النَّارِ وَأَلْبِسُوهُ مِنْ النَّارِ وَافْتَحُوا لَهُ بَابًا إِلَى النَّارِ قَالَ فَيَأْتِيهِ مِنْ حَرِّهَا وَسَمُومِهَا قَالَ وَيُضَيَّقُ عَلَيْهِ قَبْرُهُ حَتَّى تَخْتَلِفَ فِيهِ أَضْلَاعُهُ زَادَ فِي حَدِيثِ جَرِيرٍ قَالَ ثُمَّ يُقَيَّضُ لَهُ أَعْمَى أَبْكَمُ مَعَهُ مِرْزَبَّةٌ مِنْ حَدِيدٍ لَوْ ضُرِبَ بِهَا جَبَلٌ لَصَارَ تُرَابًا قَالَ فَيَضْرِبُهُ بِهَا ضَرْبَةً يَسْمَعُهَا مَا بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ إِلَّا الثَّقَلَيْنِ فَيَصِيرُ تُرَابًا قَالَ ثُمَّ تُعَادُ فِيهِ الرُّوحُحَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ حَدَّثَنَا الْمِنْهَالُ عَنْ أَبِي عُمَرَ زَاذَانَ قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَذَكَرَ نَحْوَهُ

हमरा सब के कहलक अछि [उस्मान बिन अबू स्याइबाह] कहलनि, हमरा सब के [जरीर] कहलक अछि। -एकटा आओर पाँति मे एकर जिक्र अछि- हमरा सभ केँ [हन्नाद अस साड़ी] कहलनि, हमरा सभ केँ [अबू मुअवियाह] कहलक अछि - आ ई लफज हन्नाद अछि- [अल अ'मासी] सँ [अल मिन्हल] सँ [जदजान] सँ [अल बारा बिन अजीब] सँ ओ कहलनि, 'हम रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम संग मिलिकय एकटा अंसार आदमीक लाश देखबाक लेल निकललहुँ, हम सभ ओहि ठाम पहुँचलहुँ कब्रिस्तान। जखन छेद भ गेल छल तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैसि गेलाह, तखन हम सभ हुनका बगल मे बैसल रही। हम सभ चुप भ’ गेलहुँ, जेना माथक ऊपर चिड़ै-चुनमुनी हो। ओहि समय ओ जमीन मे फंसल लाठी पकड़ने छलाह, तखन ओ माथ उठौलनि आ कहलनि: 'कबरक यातना सँ अल्लाह सँ रक्षा माँगू'। ओ वाक्य दू-तीन बेर बजलाह। जरिर के हदीस में इएह जोड़ अछि। ओ आगू बजलाह: 'सत्ते, घर जाइत काल लाश हुनका लोकनिक चप्पलक खड़खड़ाहटि सुनबा मे आओत; अर्थात् जखन हुनका सँ पूछल गेलनि जे 'हे अहाँ, अहाँक रब्ब के अछि? अहाँक धर्म की अछि ? आ अहाँक पैगम्बर के छथि ? ' -हन्नाद उल्लेख करैत छथि; ओ कहलनि : - 'तखन दू टा स्वर्गदूत हुनका लग आबि हुनका बैसा देलनि । स्वर्गदूत पुछलकै, 'अहाँक रब्ब के छै?' ओ जवाब देलनि, 'हमर रब्ब अल्लाह छथि'। स्वर्गदूत फेर पुछलखिन, 'अहाँक धर्म की अछि?' ओ उत्तर देलनि, 'हमर धर्म इस्लाम अछि'। स्वर्गदूत फेर पुछलखिन, ‘ई के अछि जे अहाँ लग पठाओल गेल छल? ' ओ जवाब देलनि, 'ओ अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रसूलुल्लाह छथि' | स्वर्गदूत फेर पुछलखिन, ‘अहाँ केँ की बुझल अछि? ओ जवाब देलनि, 'हम अल्लाह केर किताब पढ़ैत छी, हम ओकरा पर विश्वास करैत छी आ एकर पुष्टि करैत छी'। जरीर हदीस में जोड़ल गेल अछि, 'त अल्लाह के वचन के मतलब इ अछि: '-अल्लाह विश्वास करय वाला के -ईमान- के पुष्टि करैत छथि...-' आयत के अंत तक। -प्रश्न। इब्राहिम : 27- तखन दुनू कथावाचक लफज पर सहमत भेलाह, 'ओ कहलनि: 'तखन स्वर्ग सँ एकटा आवाज आयल जे बाजल, 'हमर सेवक जे कहलनि से सत्य अछि, ओकरा लेल स्वर्ग मे गलीचा पसारि दियौक, स्वर्गक दरबज्जा खोलि दियौक आ ओकरा स्वर्गक वस्त्र दियौक'। ओ आगू बजलाह: 'तखन स्वर्गक सुगंध हुनका लग आनल गेलनि, तखन हुनकर कब्र केँ जतेक दूर धरि आँखि देखि सकैत छल, विस्तारित कयल गेलनि'। ओ आगू बजलाह: ‘जँ मरि जायबला व्यक्ति अविश्वासी होयत तऽ ओकर आत्मा ओकर शरीर मे वापस आबि जायत। ओहि समय दू टा स् वर्गदूत आबि हुनका बैसा देलथिन। दुनू स्वर्गदूत पुछलखिन, 'अहाँक रब्ब के अछि?' ओ उत्तर देलनि, 'हाह, हाह, हाह।' हम नाय जानय छी'। स्वर्गदूत पुछलखिन, 'अहाँक धर्म की अछि?' ओ जबाब देलक, 'हाह, हाह।' हम नाय जानय छी'। स्वर्गदूत फेर पुछलखिन, ‘ई के अछि जे अहाँ लग पठाओल गेल छल? ' ओ उत्तर देलनि, 'हाह, हाह। हम नाय जानय छी'। तकर बाद स्वर्गसँ आवाज आयल- ‘ओ झूठ बाजल अछि । नरक सँ टाट द' दियौक, नरक सँ कपड़ा दियौक, आ ओकरा लेल नरकक फाटक खोलि दियौक'। ओ आगू बजलाह-तखन गर्मी आ नरकक गंध हुनका पर आबि गेलनि । तखन चिता ताबत धरि संकुचित कयल गेल जा धरि हड्डी सभ एक दोसराक नजदीक नहि भ' गेल।' जरीर हदीस मे जोड़ल गेल अछि जे ओ कहलनि: तखन हुनका बेड़ी मे बान्हल गेल, आन्हर आ गूंगा। आ ओकरा लोहाक गदाक व्यवस्था छलैक, जँ पहाड़ पर मारल जाय तऽ ओ अवश्य धूरा बनि जायत।' ओ आगू बजलाह: 'तखन काफिर केँ गदा सँ मारल जाइत छलैक जाबत धरि आवाज सब प्राणी केँ नहि सुनबा मे आबि गेलैक; पूर्व छोरसँ पश्चिम छोर धरि - जिन्न आ मनुक्खकेँ छोड़ि - जाबत धरि ओ सभ धूरा नहि बनि जाइत अछि' । ओ कथा आगू बजलाह : 'तकर बाद हुनकर आत्मा फेर वापस आबि गेलनि' । हमरा सब के कहलक अछि [हन्नाद बिन अस सारी] कहलनि, हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन नुमैर] कहलनि, हमरा सब के कहलक अछि [अल अ'मासी] कहलनि, हमरा सब के [अल मिन्हल] के [अबू उमर ज़ादजान] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [अल बारा] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स सुनने रही, ओ कहलनि.... तखन हदीसक जिक्र केलनि।'

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 13636, 20221, 21296, 23441, 24815, 24910, 25128, 25799, 25810, 25812
Imam Bukhari : 1283, 1287, 5887, 5889
Imam Muslim : 920, 921, 922, 1506, 5113
Imam Abu Dawud : 4127
Imam Tirmidzi : 2815, 3496
Imam Nasa'i : 1459, 2034, 2037, 2038, 5409
Imam Malik : 400, 480