प्रतिनिधि हदीस
इमाम तिर्मिदज़ी : 3480
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَجْلَانَ عَنْ الْقَعْقَاعِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَجُلًا كَانَ يَدْعُو بِإِصْبَعَيْهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحِّدْ أَحِّدْقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ وَمَعْنَى هَذَا الْحَدِيثِ إِذَا أَشَارَ الرَّجُلُ بِإِصْبَعَيْهِ فِي الدُّعَاءِ عِنْدَ الشَّهَادَةِ لَا يُشِيرُ إِلَّا بِإِصْبَعٍ وَاحِدَةٍ
हमें बताया है [मुहम्मद बिन बैसीसर] ने हमें बताया है [शफ़वान बिन ईसा] ने हमें बताया है [मुहम्मद बिन 'अजलान] ने [अल क़ाक़ा' से] [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] से कि एक आदमी अपनी दो उंगलियों का इस्तेमाल करके नमाज़ पढ़ता है। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक उंगली का इस्तेमाल करो, एक उंगली का इस्तेमाल करो!" अबू ईसा ने कहा; यह हदीस एक हसन शाहीह ग़रीब हदीस है, और इस हदीस का मतलब यह है कि अगर कोई शहादा के दौरान नमाज़ पढ़ते समय दो उंगलियों से इशारा करता है तो वह एक उंगली के अलावा किसी और चीज़ से इशारा नहीं कर सकता।