प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 6258
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا عِنْدَنَا كِتَابٌ نَقْرَؤُهُ إِلَّا كِتَابُ اللَّهِ غَيْرَ هَذِهِ الصَّحِيفَةِ قَالَ فَأَخْرَجَهَا فَإِذَا فِيهَا أَشْيَاءُ مِنْ الْجِرَاحَاتِ وَأَسْنَانِ الْإِبِلِ قَالَ وَفِيهَا الْمَدِينَةُ حَرَمٌ مَا بَيْنَ عَيْرٍ إِلَى ثَوْرٍ فَمَنْ أَحْدَثَ فِيهَا حَدَثًا أَوْ آوَى مُحْدِثًا فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لَا يُقْبَلُ مِنْهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ صَرْفٌ وَلَا عَدْلٌ وَمَنْ وَالَى قَوْمًا بِغَيْرِ إِذْنِ مَوَالِيهِ فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لَا يُقْبَلُ مِنْهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ صَرْفٌ وَلَا عَدْلٌ وَذِمَّةُ الْمُسْلِمِينَ وَاحِدَةٌ يَسْعَى بِهَا أَدْنَاهُمْ فَمَنْ أَخْفَرَ مُسْلِمًا فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لَا يُقْبَلُ مِنْهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ صَرْفٌ وَلَا عَدْلٌ
हमें बताया है [कुतैबा बिन सईद] ने हमें [जरीर] [अल अमासी] से [इब्राहिम अत तैमी] से [उनके पिता] से बताया है, [अली] रदिअल्लाहु अन्हु ने कहा; 'हमारे पास कोई किताब नहीं है जिसे हम पढ़ें सिवाय अल्लाह की किताब और इस शीट के।' तैमी के पिता ने समझाया; फिर अली ने उसे निकाला, जिसमें पत्थर और ऊँट के दाँतों से बनी कई चीज़ें थीं, जिन पर लिखा था: “मदीना शहर हराम (पवित्र) है, यानी एयर और त्सौर के बीच का इलाका। तो जो कोई इसमें बुरा करेगा, या इसमें बुरा करने का इरादा रखेगा, उस पर अल्लाह, फ़रिश्तों और सारी इंसानों की लानत ज़रूर आएगी। अल्लाह क़यामत के दिन उससे उसके फ़र्ज़ काम या सुन्नत के काम मंज़ूर नहीं करेगा। और जिस किसी का कोई वली हो, उसके वली की इजाज़त के बिना, तो अल्लाह, फ़रिश्तों और सारी इंसानों की लानत उस पर आएगी, वह क़यामत के दिन मंज़ूर नहीं होगा, उसके फ़र्ज़ काम या सुन्नत के काम एक हैं, जहाँ ज़िम्मा सबसे निचले पर लागू होता है। जो कोई मुसलमान का वादा तोड़ता है, तो अल्लाह, फ़रिश्तों और सारी इंसानों की लानत उस पर आएगी, उससे क़यामत के दिन फ़र्ज़ काम या सुन्नत के काम मंज़ूर नहीं होंगे।