इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Ilmu dan Manhaj Membenci kebid’ahan dan memboikotnya (hajr) Berbuat atau membantu berbuat bid'ah tidak diterima amalan wajib dan sunnahnya

Hadith Search Results :
Total Hadith : 1
Hadith Representative
Berbuat atau membantu berbuat bid'ah tidak diterima amalan wajib dan sunnahnya
Imam Bukhari : 1737

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَمَا عِنْدَنَا شَيْءٌ إِلَّا كِتَابُ اللَّهِ وَهَذِهِ الصَّحِيفَةُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَدِينَةُ حَرَمٌ مَا بَيْنَ عَائِرٍ إِلَى كَذَا مَنْ أَحْدَثَ فِيهَا حَدَثًا أَوْ آوَى مُحْدِثًا فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لَا يُقْبَلُ مِنْهُ صَرْفٌ وَلَا عَدْلٌ وَقَالَ ذِمَّةُ الْمُسْلِمِينَ وَاحِدَةٌ فَمَنْ أَخْفَرَ مُسْلِمًا فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لَا يُقْبَلُ مِنْهُ صَرْفٌ وَلَا عَدْلٌ وَمَنْ تَوَلَّى قَوْمًا بِغَيْرِ إِذْنِ مَوَالِيهِ فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لَا يُقْبَلُ مِنْهُ صَرْفٌ وَلَا عَدْلٌقَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ عَدْلٌ فِدَاءٌ

हमरा सब स रिवायत अछि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमरा सब स रिवायत केने छथि [अब्दुररहमान] हमरा सब स [सूफयान] स [अल अ'माश] स [इब्राहिम अत-तैयमी] स [अपन पिता] स [अली रदलियाल्लाहु अनहु] स रिवायत केने छथि: 'हमरा सब लग अल्लाह के किताब आ ऐश-सहिफा के अलावा किछु नहि अछि - हदीस के ई पन्ना - स पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे मदीना एकटा पवित्र भूमि अछि जकर इलाका सहारा रेगिस्तान आ एहि के बीच अछि | त जे कियो बुराई करत - बिदअह - जे ओहि मे धर्म द्वारा मना कयल गेल अछि या लोक के बिदअह करबा मे मदद करत तखन ओहि व्यक्ति के अल्लाह, फरिश्ता आ सब लोक स अभिशाप भेटत आ ओकरा स ओकर 'फजज आ सुन्नत के इबादत' - या ओकर पश्चाताप आ कफना - स्वीकार नहि कयल जायत। आरू हुनी कहलकै: 'मुसलमानऽ के रक्षा एक छै, ई लेली जे भी मुसलमान के साथ वाचा तोड़ी दै छै, वू व्यक्ति अल्लाह, फरिश्ता आरू सब मनुष्य द्वारा श्रापित होय जैतै आरू ओकरा स॑ ओकरा लेली फर्ज इबादत आरू सुन्नत स्वीकार नै करतै आरू जे भी अपनऽ रक्षक के अनुमति के बिना कोनो लोगऽ के रक्षकता लेतै त॑ वू व्यक्ति क॑ अल्लाह, स्वर्गदूत आरू सब मनुष्य स॑ अभिशाप मिलतै आरू ओकरा स॑ 'ओब्लिगेशन' के मर्यादा स्वीकार नै करतै इबादत आ सुन्नत'। कहा, अबू अब्दुल्लाह अल बुखारी: अल'अद शब्द के मतलब छै: 'फिरौती' |

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 581, 1231, 9432, 10384, 13051
Imam Bukhari : 1737, 2936, 2943, 6762
Imam Muslim : 2434
Imam Abu Dawud : 1739