प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 613
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ قَالَ سَمِعْتُ سَالِمًا قَالَ سَمِعْتُ أُمَّ الدَّرْدَاءِ تَقُولُ دَخَلَ عَلَيَّ أَبُو الدَّرْدَاءِوَهُوَ مُغْضَبٌ فَقُلْتُ مَا أَغْضَبَكَ فَقَالَ وَاللَّهِ مَا أَعْرِفُ مِنْ أُمَّةِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا إِلَّا أَنَّهُمْ يُصَلُّونَ جَمِيعًا
हमसे कहा है ['उमर बिन हफ़्श] ने कहा, हमसे कहा है [मेरे पिता] ने कहा, हमसे कहा है [अल अमासी] ने कहा, मैंने [सलीम] को कहते सुना, "मैंने [उम्मू दर्दा'] को कहते सुना," [अबू दर्दा'] गुस्से में मुझसे मिलने आया था। तब मैंने उससे पूछा, 'तुम्हें किस बात पर गुस्सा आता है?' तो उसने जवाब दिया, "अल्लाह की कसम, मैं मुहम्मद के लोगों के बारे में कुछ नहीं जानता सिवाय इसके कि वे हमेशा जमात के साथ नमाज़ पढ़ते हैं।"