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Rasulullah menjamak Shalat zhuhur dan ashar ketika bersinggah dalam perjalanan
Imam Nasa'i : 494أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ قَالَ حَدَّثَنِي حَمْزَةُ الْعَائِذِيُّ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا نَزَلَ مَنْزِلًا لَمْ يَرْتَحِلْ مِنْهُ حَتَّى يُصَلِّيَ الظُّهْرَ فَقَالَ رَجُلٌ وَإِنْ كَانَتْ بِنِصْفِ النَّهَارِ قَالَ وَإِنْ كَانَتْ بِنِصْفِ النَّهَارِ
हमरा सभकेँ [उबैदुल्लाह बिन सईद] हमरा सभकेँ [यह्या बिन सईद] [स्यूबाह]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हमरा [हमजाह अल 'आ`इद्जी] कहि ओ कहलनि; सुनलहुँ [अनस बिन मलिक] ओ कहलनि; ' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जखन ओ कोनो जगह पर रुकल छलाह तखन ओ शल्लल्लाहु अलैहि वसलम। झुहुर नमाज करबा स पहिने ओहि स्थान स नहि निकलू। तखन एकटा आदमी छल जे कहलक जे भले मात्र आधा दिन भ' गेल हो? ' हम उत्तर देलियनि, 'हँ, भले मात्र आधा दिन भ' गेल हो' ।