हदीस
Darah tidak najis, satu helai kain yang dipakai waktu haid, jika kain terkena sedikit darah, cukup dicuci dengan air
Imam Tirmidzi : 128حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍأَنَّ امْرَأَةً سَأَلَتْ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الثَّوْبِ يُصِيبُهُ الدَّمُ مِنْ الْحَيْضَةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حُتِّيهِ ثُمَّ اقْرُصِيهِ بِالْمَاءِ ثُمَّ رُشِّيهِ وَصَلِّي فِيهِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَأُمِّ قَيْسِ بْنتِ مِحْصَنٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَسْمَاءَ فِي غَسْلِ الدَّمِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الدَّمِ يَكُونُ عَلَى الثَّوْبِ فَيُصَلِّي فِيهِ قَبْلَ أَنْ يَغْسِلَهُ قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ إِذَا كَانَ الدَّمُ مِقْدَارَ الدِّرْهَمِ فَلَمْ يَغْسِلْهُ وَصَلَّى فِيهِ أَعَادَ الصَّلَاةَ و قَالَ بَعْضُهُمْ إِذَا كَانَ الدَّمُ أَكْثَرَ مِنْ قَدْرِ الدِّرْهَمِ أَعَادَ الصَّلَاةَ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَلَمْ يُوجِبْ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ وَغَيْرِهِمْ عَلَيْهِ الْإِعَادَةَ وَإِنْ كَانَ أَكْثَرَ مِنْ قَدْرِ الدِّرْهَمِ وَبِهِ يَقُولُ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ و قَالَ الشَّافِعِيُّ يَجِبُ عَلَيْهِ الْغَسْلُ وَإِنْ كَانَ أَقَلَّ مِنْ قَدْرِ الدِّرْهَمِ وَشَدَّدَ فِي ذَلِكَ
हमनी के बतवले बाड़े [इब्न अबू उमर] कहले बाड़े; हमनी के [सुफयान बिन उयैनह] से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [फतिमा बिंत अल मुंडिर] से [अस्मा बिंत अबू बकर] से बतवले बाड़े कहले बाड़े; 'एक औरत नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मासिक धर्म के खून से दागदार कपड़ा के बारे में पूछली?' तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले: 'कपड़ा के रगड़ के, फिर ओकरा के भींज के पानी से धो लीं, ओकरा बाद ओकरा से नमाज पढ़ीं'। ऊ कहले कि; 'एह अध्याय में अबू हुरैरा आ उम्म कैस बिंत मिहशान से भी एगो इतिहास बा'। अबू ईसा कहले कि; 'मासिक धर्म के खून धोवे के बारे में असमा के हदीस हसन प्रामाणिक बा।' कपड़ा पर चढ़े वाला आ धोवे से पहिले नमाज खातिर पहिरल जाए वाला खून के बारे में विद्वान लोग के अलग-अलग राय बा। तबीईन के कुछ विद्वान लोग कहल कि; 'अगर खून दिरहम के आकार के बा, अवुरी उ ओकरा के धोवे से पहिले ओकरा के पहिर लेले, त ओकरा आपन नमाज दोहरावे के होई'। जबकि कुछ अउरी लोग कहल कि; 'अगर खून दिरहम के आकार से बड़ बा त ओकरा नमाज दोहरावे के पड़ी'। ई राय सुफियन अतस त्साऊरी आ बिन अल मुबारक के रहे। हालांकि ताबीईन में से कुछ अवुरी विद्वान अवुरी कुछ लोग के नमाज दोहरावे के जरूरत ना रहे, भले ही खून दिरहम से जादे - बड़ - होखे। ई राय अहमद आ इशहाक के रहे। स्याफी'ई कहले कि; 'खून दिरहम के आकार से कम होखला के बावजूद धोवल फर्ज बा'। आ ऊ ओह बात के पालन कइलन'.