हदीस
Seorang sabar kesulitan di Madinah dia mati, aku penolongnya di hari kiamat
Imam Tirmidzi : 3853حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ قَال سَمِعْتُ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاأَنَّ مَوْلَاةً لَهُ أَتَتْهُ فَقَالَتْ اشْتَدَّ عَلَيَّ الزَّمَانُ وَإِنِّي أُرِيدُ أَنْ أَخْرُجَ إِلَى الْعِرَاقِ قَالَ فَهَلَّا إِلَى الشَّامِ أَرْضِ الْمَنْشَرِ اصْبِرِي لَكَاعِ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ صَبَرَ عَلَى شِدَّتِهَا وَلَأْوَائِهَا كُنْتُ لَهُ شَهِيدًا أَوْ شَفِيعًا يَوْمَ الْقِيَامَةِوَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي سَعِيدٍ وَسُفْيَانَ بْنِ أَبِي زُهَيْرٍ وَسُبَيْعَةَ الْأَسْلَمِيَّةِ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ مِنْ حَدِيثِ عُبَيْدِ اللَّهِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल अ'ला] हमनी के बतवले बाड़े [अल मुअतमीर बिन सुलेमान] उ कहले बाड़े; [‘उबैदुल्लाह बिन उमर] के [नाफी’] से [इब्न उमर रदलियाहु अन्हुमा] से सुनले रहनी कि जवन पूर्व महिला गुलाम उ आजाद कईले रहले, उ उनुका के देखे आईल रहली, कहत रहली; उ कहले कि, अभी हमरा केतना भी कठिनाई महसूस होखे, असल में हम इराक खाती रवाना होखे वाला बानी। इब्न उमर कहले कि; 'का रउआ खाली सीरिया मत जाईं काहे कि ई पवित्र भूमि में से एगो ह, धैर्य राखीं, हे आदमी जे जल्दी ऊब जाला, काहे कि साँचहू हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि जे केहू अपना कठिनाई आ कठिनाई के धैर्य राखेला, तब हम ओकरा खातिर कयामत के दिन गवाह भा बिनती बनब।' आ एह अध्याय में अबू सैद, सुफियान बिन अबू जुहैर आ सुबैआ अल असलमिया से भी इतिहास बा। अबू ईसा कहले कि; 'ई हदीस 'उबैदिल्लाह' हदीस से हसन शाहिह घरीब हदीस ह।