प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 3151
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ نَصْرٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِيلَ لِبَنِي إِسْرَائِيلَ{ ادْخُلُوا الْبَابَ سُجَّدًا وَقُولُوا حِطَّةٌ }فَبَدَّلُوا فَدَخَلُوا يَزْحَفُونَ عَلَى أَسْتَاهِهِمْ وَقَالُوا حَبَّةٌ فِي شَعْرَةٍ
मुझे [इसहाक बिन नश्र] ने [अब्दुर रज्जाक] को [मामार] से [हम्माम बिन मुनब्बिह] से बताया है कि उन्होंने [अबू हुरैरा रदियल्लाहु अन्हु] को यह कहते सुना; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बनी इस्राइल से कहा गया, ("तुम सजदा करते हुए और कहते हुए दरवाज़े से अंदर जाओ; हमें गुनाह से बचाओ"), (QS अल-बक़रा आयत 58)। लेकिन उन्होंने इसे बदल दिया और अपने कूल्हों के बल रेंगते हुए अंदर गए, यह कहते हुए: "गेहूँ का फल"