प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 2683
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْتَقَى هُوَ وَالْمُشْرِكُونَ فَاقْتَتَلُوا فَلَمَّا مَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى عَسْكَرِهِ وَمَالَ الْآخَرُونَ إِلَى عَسْكَرِهِمْ وَفِي أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلٌ لَا يَدَعُ لَهُمْ شَاذَّةً وَلَا فَاذَّةً إِلَّا اتَّبَعَهَا يَضْرِبُهَا بِسَيْفِهِ فَقَالَ مَا أَجْزَأَ مِنَّا الْيَوْمَ أَحَدٌ كَمَا أَجْزَأَ فُلَانٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا إِنَّهُ مِنْ أَهْلِ النَّارِ فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ الْقَوْمِ أَنَا صَاحِبُهُ قَالَ فَخَرَجَ مَعَهُ كُلَّمَا وَقَفَ وَقَفَ مَعَهُ وَإِذَا أَسْرَعَ أَسْرَعَ مَعَهُ قَالَ فَجُرِحَ الرَّجُلُ جُرْحًا شَدِيدًا فَاسْتَعْجَلَ الْمَوْتَ فَوَضَعَ نَصْلَ سَيْفِهِ بِالْأَرْضِ وَذُبَابَهُ بَيْنَ ثَدْيَيْهِ ثُمَّ تَحَامَلَ عَلَى سَيْفِهِ فَقَتَلَ نَفْسَهُ فَخَرَجَ الرَّجُلُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَشْهَدُ أَنَّكَ رَسُولُ اللَّهِ قَالَ وَمَا ذَاكَ قَالَ الرَّجُلُ الَّذِي ذَكَرْتَ آنِفًا أَنَّهُ مِنْ أَهْلِ النَّارِ فَأَعْظَمَ النَّاسُ ذَلِكَ فَقُلْتُ أَنَا لَكُمْ بِهِ فَخَرَجْتُ فِي طَلَبِهِ ثُمَّ جُرِحَ جُرْحًا شَدِيدًا فَاسْتَعْجَلَ الْمَوْتَ فَوَضَعَ نَصْلَ سَيْفِهِ فِي الْأَرْضِ وَذُبَابَهُ بَيْنَ ثَدْيَيْهِ ثُمَّ تَحَامَلَ عَلَيْهِ فَقَتَلَ نَفْسَهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عِنْدَ ذَلِكَ إِنَّ الرَّجُلَ لَيَعْمَلُ عَمَلَ أَهْلِ الْجَنَّةِ فِيمَا يَبْدُو لِلنَّاسِ وَهُوَ مِنْ أَهْلِ النَّارِ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَعْمَلُ عَمَلَ أَهْلِ النَّارِ فِيمَا يَبْدُو لِلنَّاسِ وَهُوَ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ
हमें [कुतैबा] ने [याकूब बिन अब्दुर रहमान] [अबू हाज़िम] से [सहाल बिन सअद अस-सईदी रदियल्लाहु अन्हु] तक बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुशरिकों का सामना किया और आपस में युद्ध किया। जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी सेना में शामिल हुए और उनके दुश्मन भी उनकी सेना में शामिल हो गए, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों में से एक ऐसा था जो अकेला पाया गया, बहुत बुरी तरह घायल था और तलवार से मारा गया था। फिर उसके बाद किसी ने कहा: "आज हममें से किसी को वह इनाम नहीं मिला जो फलां को मिला है।" हालाँकि, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जान लो कि वह वास्तव में नरक वालों में से एक है।" तब भीड़ में से एक आदमी ने कहा; "मैं उस आदमी के साथ था, उस आदमी ने मुझे बताया कि वह फलां आदमी के साथ गया था, ताकि जब वह रुके तो वह भी रुक जाए और जब वह हमला करे तो वह भी हमला करे, उस आदमी ने कहा: "फिर फलां आदमी इतनी बुरी तरह घायल हो गया कि वह लगभग मरने वाला था। फिर उस आदमी ने अपनी तलवार ज़मीन पर रखी और तलवार की नोक अपनी दोनों छाती के बीच रख ली और फिर उसने खुद को मार डाला।" तो जो आदमी उसके साथ था, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास गया और कहा: "मैं गवाही देता हूँ कि आप सच में अल्लाह के रसूल हैं।" पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पूछा: "तुम ऐसा क्यों कहते हो?" उस आदमी ने जवाब दिया: "क्योंकि फलां आदमी जिसका तुमने ज़िक्र किया वह सच में जहन्नुम का रहने वाला है।" तो लोग उसकी बात सुनकर चौंक गए। मैंने कहा: "मैं गवाह हूँ। मैं उसके साथ बाहर गया जहाँ मैंने उसे ढूँढा और पाया कि वह बुरी तरह घायल था और लगभग मरने वाला था। फिर उसने अपनी तलवार ज़मीन पर रखी और तलवार की नोक अपनी दोनों छाती के बीच रख ली और फिर उसने खुद को मार डाला। तो उस मौके पर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह भी कहा: "ज़रूर कोई ऐसा है जो इंसानों को दिखने वाली चीज़ों के आधार पर जन्नत वालों के काम करता है, भले ही वह जहन्नम वालों के ग्रुप से हो। और कोई ऐसा भी है जो इंसानों को दिखने वाली चीज़ों के आधार पर जहन्नम वालों के काम करता है, भले ही वह जन्नत वालों के ग्रुप से हो।"