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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 6525

حَدَّثَنِي مُؤَمَّلُ بْنُ هِشَامٍ أَبُو هِشَامٍ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا عَوْفٌ حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ حَدَّثَنَا سَمُرَةُ بْنُ جُنْدُبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِمَّا يُكْثِرُ أَنْ يَقُولَ لِأَصْحَابِهِ هَلْ رَأَى أَحَدٌ مِنْكُمْ مِنْ رُؤْيَا قَالَ فَيَقُصُّ عَلَيْهِ مَنْ شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَقُصَّ وَإِنَّهُ قَالَ ذَاتَ غَدَاةٍ إِنَّهُ أَتَانِي اللَّيْلَةَ آتِيَانِ وَإِنَّهُمَا ابْتَعَثَانِي وَإِنَّهُمَا قَالَا لِي انْطَلِقْ وَإِنِّي انْطَلَقْتُ مَعَهُمَا وَإِنَّا أَتَيْنَا عَلَى رَجُلٍ مُضْطَجِعٍ وَإِذَا آخَرُ قَائِمٌ عَلَيْهِ بِصَخْرَةٍ وَإِذَا هُوَ يَهْوِي بِالصَّخْرَةِ لِرَأْسِهِ فَيَثْلَغُ رَأْسَهُ فَيَتَهَدْهَدُ الْحَجَرُ هَا هُنَا فَيَتْبَعُ الْحَجَرَ فَيَأْخُذُهُ فَلَا يَرْجِعُ إِلَيْهِ حَتَّى يَصِحَّ رَأْسُهُ كَمَا كَانَ ثُمَّ يَعُودُ عَلَيْهِ فَيَفْعَلُ بِهِ مِثْلَ مَا فَعَلَ الْمَرَّةَ الْأُولَى قَالَ قُلْتُ لَهُمَا سُبْحَانَ اللَّهِ مَا هَذَانِ قَالَ قَالَا لِي انْطَلِقْ انْطَلِقْ قَالَ فَانْطَلَقْنَا فَأَتَيْنَا عَلَى رَجُلٍ مُسْتَلْقٍ لِقَفَاهُ وَإِذَا آخَرُ قَائِمٌ عَلَيْهِ بِكَلُّوبٍ مِنْ حَدِيدٍ وَإِذَا هُوَ يَأْتِي أَحَدَ شِقَّيْ وَجْهِهِ فَيُشَرْشِرُ شِدْقَهُ إِلَى قَفَاهُ وَمَنْخِرَهُ إِلَى قَفَاهُ وَعَيْنَهُ إِلَى قَفَاهُ قَالَ وَرُبَّمَا قَالَ أَبُو رَجَاءٍ فَيَشُقُّ قَالَ ثُمَّ يَتَحَوَّلُ إِلَى الْجَانِبِ الْآخَرِ فَيَفْعَلُ بِهِ مِثْلَ مَا فَعَلَ بِالْجَانِبِ الْأَوَّلِ فَمَا يَفْرُغُ مِنْ ذَلِكَ الْجَانِبِ حَتَّى يَصِحَّ ذَلِكَ الْجَانِبُ كَمَا كَانَ ثُمَّ يَعُودُ عَلَيْهِ فَيَفْعَلُ مِثْلَ مَا فَعَلَ الْمَرَّةَ الْأُولَى قَالَ قُلْتُ سُبْحَانَ اللَّهِ مَا هَذَانِ قَالَ قَالَا لِي انْطَلِقْ انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا فَأَتَيْنَا عَلَى مِثْلِ التَّنُّورِ قَالَ فَأَحْسِبُ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ فَإِذَا فِيهِ لَغَطٌ وَأَصْوَاتٌ قَالَ فَاطَّلَعْنَا فِيهِ فَإِذَا فِيهِ رِجَالٌ وَنِسَاءٌ عُرَاةٌ وَإِذَا هُمْ يَأْتِيهِمْ لَهَبٌ مِنْ أَسْفَلَ مِنْهُمْ فَإِذَا أَتَاهُمْ ذَلِكَ اللَّهَبُ ضَوْضَوْا قَالَ قُلْتُ لَهُمَا مَا هَؤُلَاءِ قَالَ قَالَا لِي انْطَلِقْ انْطَلِقْ قَالَ فَانْطَلَقْنَا فَأَتَيْنَا عَلَى نَهَرٍ حَسِبْتُ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ أَحْمَرَ مِثْلِ الدَّمِ وَإِذَا فِي النَّهَرِ رَجُلٌ سَابِحٌ يَسْبَحُ وَإِذَا عَلَى شَطِّ النَّهَرِ رَجُلٌ قَدْ جَمَعَ عِنْدَهُ حِجَارَةً كَثِيرَةً وَإِذَا ذَلِكَ السَّابِحُ يَسْبَحُ مَا يَسْبَحُ ثُمَّ يَأْتِي ذَلِكَ الَّذِي قَدْ جَمَعَ عِنْدَهُ الْحِجَارَةَ فَيَفْغَرُ لَهُ فَاهُ فَيُلْقِمُهُ حَجَرًا فَيَنْطَلِقُ يَسْبَحُ ثُمَّ يَرْجِعُ إِلَيْهِ كُلَّمَا رَجَعَ إِلَيْهِ فَغَرَ لَهُ فَاهُ فَأَلْقَمَهُ حَجَرًا قَالَ قُلْتُ لَهُمَا مَا هَذَانِ قَالَ قَالَا لِي انْطَلِقْ انْطَلِقْ قَالَ فَانْطَلَقْنَا فَأَتَيْنَا عَلَى رَجُلٍ كَرِيهِ الْمَرْآةِ كَأَكْرَهِ مَا أَنْتَ رَاءٍ رَجُلًا مَرْآةً وَإِذَا عِنْدَهُ نَارٌ يَحُشُّهَا وَيَسْعَى حَوْلَهَا قَالَ قُلْتُ لَهُمَا مَا هَذَا قَالَ قَالَا لِي انْطَلِقْ انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا فَأَتَيْنَا عَلَى رَوْضَةٍ مُعْتَمَّةٍ فِيهَا مِنْ كُلِّ لَوْنِ الرَّبِيعِ وَإِذَا بَيْنَ ظَهْرَيْ الرَّوْضَةِ رَجُلٌ طَوِيلٌ لَا أَكَادُ أَرَى رَأْسَهُ طُولًا فِي السَّمَاءِ وَإِذَا حَوْلَ الرَّجُلِ مِنْ أَكْثَرِ وِلْدَانٍ رَأَيْتُهُمْ قَطُّ قَالَ قُلْتُ لَهُمَا مَا هَذَا مَا هَؤُلَاءِ قَالَ قَالَا لِي انْطَلِقْ انْطَلِقْ قَالَ فَانْطَلَقْنَا فَانْتَهَيْنَا إِلَى رَوْضَةٍ عَظِيمَةٍ لَمْ أَرَ رَوْضَةً قَطُّ أَعْظَمَ مِنْهَا وَلَا أَحْسَنَ قَالَ قَالَا لِي ارْقَ فِيهَا قَالَ فَارْتَقَيْنَا فِيهَا فَانْتَهَيْنَا إِلَى مَدِينَةٍ مَبْنِيَّةٍ بِلَبِنِ ذَهَبٍ وَلَبِنِ فِضَّةٍ فَأَتَيْنَا بَابَ الْمَدِينَةِ فَاسْتَفْتَحْنَا فَفُتِحَ لَنَا فَدَخَلْنَاهَا فَتَلَقَّانَا فِيهَا رِجَالٌ شَطْرٌ مِنْ خَلْقِهِمْ كَأَحْسَنِ مَا أَنْتَ رَاءٍ وَشَطْرٌ كَأَقْبَحِ مَا أَنْتَ رَاءٍ قَالَ قَالَا لَهُمْ اذْهَبُوا فَقَعُوا فِي ذَلِكَ النَّهَرِ قَالَ وَإِذَا نَهَرٌ مُعْتَرِضٌ يَجْرِي كَأَنَّ مَاءَهُ الْمَحْضُ فِي الْبَيَاضِ فَذَهَبُوا فَوَقَعُوا فِيهِ ثُمَّ رَجَعُوا إِلَيْنَا قَدْ ذَهَبَ ذَلِكَ السُّوءُ عَنْهُمْ فَصَارُوا فِي أَحْسَنِ صُورَةٍ قَالَ قَالَا لِي هَذِهِ جَنَّةُ عَدْنٍ وَهَذَاكَ مَنْزِلُكَ قَالَ فَسَمَا بَصَرِي صُعُدًا فَإِذَا قَصْرٌ مِثْلُ الرَّبَابَةِ الْبَيْضَاءِ قَالَ قَالَا لِي هَذَاكَ مَنْزِلُكَ قَالَ قُلْتُ لَهُمَا بَارَكَ اللَّهُ فِيكُمَا ذَرَانِي فَأَدْخُلَهُ قَالَا أَمَّا الْآنَ فَلَا وَأَنْتَ دَاخِلَهُ قَالَ قُلْتُ لَهُمَا فَإِنِّي قَدْ رَأَيْتُ مُنْذُ اللَّيْلَةِ عَجَبًا فَمَا هَذَا الَّذِي رَأَيْتُ قَالَ قَالَا لِي أَمَا إِنَّا سَنُخْبِرُكَ أَمَّا الرَّجُلُ الْأَوَّلُ الَّذِي أَتَيْتَ عَلَيْهِ يُثْلَغُ رَأْسُهُ بِالْحَجَرِ فَإِنَّهُ الرَّجُلُ يَأْخُذُ الْقُرْآنَ فَيَرْفُضُهُ وَيَنَامُ عَنْ الصَّلَاةِ الْمَكْتُوبَةِ وَأَمَّا الرَّجُلُ الَّذِي أَتَيْتَ عَلَيْهِ يُشَرْشَرُ شِدْقُهُ إِلَى قَفَاهُ وَمَنْخِرُهُ إِلَى قَفَاهُ وَعَيْنُهُ إِلَى قَفَاهُ فَإِنَّهُ الرَّجُلُ يَغْدُو مِنْ بَيْتِهِ فَيَكْذِبُ الْكَذْبَةَ تَبْلُغُ الْآفَاقَ وَأَمَّا الرِّجَالُ وَالنِّسَاءُ الْعُرَاةُ الَّذِينَ فِي مِثْلِ بِنَاءِ التَّنُّورِ فَإِنَّهُمْ الزُّنَاةُ وَالزَّوَانِي وَأَمَّا الرَّجُلُ الَّذِي أَتَيْتَ عَلَيْهِ يَسْبَحُ فِي النَّهَرِ وَيُلْقَمُ الْحَجَرَ فَإِنَّهُ آكِلُ الرِّبَا وَأَمَّا الرَّجُلُ الْكَرِيهُ الْمَرْآةِ الَّذِي عِنْدَ النَّارِ يَحُشُّهَا وَيَسْعَى حَوْلَهَا فَإِنَّهُ مَالِكٌ خَازِنُ جَهَنَّمَ وَأَمَّا الرَّجُلُ الطَّوِيلُ الَّذِي فِي الرَّوْضَةِ فَإِنَّهُ إِبْرَاهِيمُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَمَّا الْوِلْدَانُ الَّذِينَ حَوْلَهُ فَكُلُّ مَوْلُودٍ مَاتَ عَلَى الْفِطْرَةِ قَالَ فَقَالَ بَعْضُ الْمُسْلِمِينَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَأَوْلَادُ الْمُشْرِكِينَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَوْلَادُ الْمُشْرِكِينَ وَأَمَّا الْقَوْمُ الَّذِينَ كَانُوا شَطْرٌ مِنْهُمْ حَسَنًا وَشَطْرٌ قَبِيحًا فَإِنَّهُمْ قَوْمٌ خَلَطُوا عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا تَجَاوَزَ اللَّهُ عَنْهُمْ

मुझे बताया है [मुअम्मल बिन हिशाम अबू हिशाम] ने हमें बताया है [इस्माईल बिन इब्राहीम] ने हमें बताया है [औफ] ने हमें बताया है [अबू राजा] ने हमें बताया है [समुराह बिन जुन्दब] रदलिल्लाहु अन्हु, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अक्सर अपने साथियों से कहते थे; "क्या तुममें से किसी ने सपना देखा?" समुराह ने कहा; फिर उनमें से कुछ लोग हैं जो कहानी सुनाते हैं। एक बार भोर में, उन्होंने कहा: "दो लोग पूरी रात मेरे पास आए, दोनों ने मुझे चलने के लिए आमंत्रित किया और कहा; 'चलो चलें!' मैं उनके साथ गया, और हम एक आदमी के पास आए जो लेटा हुआ था और दूसरा उसके पास एक बड़ा पत्थर ले कर खड़ा था, फिर उसने पत्थर उसके सिर पर गिरा दिया जिससे उसका सिर टूट गया और पत्थर यहां लुढ़क गया। आदमी पत्थर का पीछा करता रहा और उसे उठाता रहा, लेकिन इससे पहले कि वह उस पर लौटता जिस पर उसने पत्थर फेंका था, उसका सिर अपनी मूल स्थिति में लौट आया था। फिर आदमी उसके पास वापस गया और पहले की तरह किया। मैंने उन दो आदमियों से पूछा जो मुझे लाए थे: 'सुभानअल्लाह, ये दो लोग ऐसे क्यों हैं?' उन दोनों ने जवाब दिया: 'पहले दूसरी जगह चलें!' हम गए, फिर हम एक आदमी के पास आए जो अपनी गर्दन के बल पीठ के बल लेटा हुआ था जबकि एक और आदमी उसके पास लोहे का हुक लिए खड़ा था, उसने उसके चेहरे के एक तरफ से पकड़ा और उसकी ठुड्डी को उसकी गर्दन के पिछले हिस्से तक, और उसके गले को उसकी गर्दन के पिछले हिस्से तक, और उसकी आंखों को उसकी गर्दन के पिछले हिस्से तक काट दिया" - सईद औफ, कभी-कभी अबू राजा' शब्द का उपयोग करता है; 'फिर उसकी ठोड़ी को चीर दिया, काटा नहीं- 'फिर काटने वाला व्यक्ति ठोड़ी के दूसरी ओर चला गया और अपने शिकार के साथ वैसा ही व्यवहार किया जैसा उसने पहली ओर किया था। इससे पहले कि वह दूसरी ठोड़ी को काटना समाप्त करता, फिर ठोड़ी का पहला भाग अपनी मूल स्थिति में लौट आया, इसलिए व्यक्ति ने पहले की तरह उसका उपचार किया। इसलिए मैंने पूछा; 'सुभानअल्लाह, ये दो लोग क्यों हैं?' लेकिन जो दो लोग मुझे लाए थे उन्होंने केवल इतना कहा; 'चलो पहले दूसरी जगह चलते हैं!' इसलिए हम चले गए, जब तक कि हम एक भट्टी जैसी जगह पर नहीं आ गए।" अबू राजा ने कहा, जैसा कि मुझे याद है समुराह ने कहा था; "भट्ठी से गड़गड़ाहट की आवाज आई। - फिर हमने अंदर देखा, बिना यह महसूस किए कि नग्न पुरुष और महिलाएं थे, उनके नीचे से लपटें आ रही थीं, अगर लपटें उन्हें छूतीं, तो वे कराहते थे। इसलिए मैंने उन दो लोगों से पूछा जो मुझे लाए थे; 'इन लोगों के साथ वास्तव में क्या गलत है? 'नदी खून की तरह लाल है-,' मुझे पता नहीं था, नदी में एक आदमी तैर रहा था, वहीं नदी किनारे एक आदमी बहुत सारे पत्थर जमा कर रहा था, जब तैरने वाला आदमी नदी के किनारे पहुँचता, जहाँ पत्थर जमा करने वाला आदमी पहुँचता, तो वह अपना मुँह खोलता और किनारे वाला आदमी उसके मुँह में पत्थर डाल देता, फिर वह वापस तैरता, हर बार जब वह किनारे पर लौटता, तो उसका मुँह खुल जाता और किनारे वाला आदमी उसे पत्थर खिला देता। मैंने उन दो लोगों से पूछा जो मुझे ले जा रहे थे; 'ये दो लोग क्यों हैं?' उन दोनों ने जवाब दिया; 'चलो पहले कहीं और चलते हैं!' तो हम चल पड़े, फिर हम एक ऐसे आदमी के पास पहुँचे जिसका चेहरा इतना डरावना था जितना आपने कभी देखा होगा। और उसके पास एक आग जल रही थी जिसे वह जला रहा था और उसके चारों ओर दौड़ रहा था। मैंने उन दो लोगों से पूछा जो मुझे ले जा रहे थे; 'यह आदमी क्यों है?' मुझे ले जा रहे दो लोगों ने कहा; 'चलो पहले कहीं और चलते हैं!' तो हम निकल पड़े। फिर हम एक बगीचे में पहुँचे जो बसंत के रंगों से भरा हुआ था, बगीचे के दोनों किनारों के बीच एक लंबा आदमी था, जैसा मैंने शायद ही कभी कोई इंसान देखा हो जिसका सिर आसमान की तरफ उठा हुआ था और उसके आस-पास कई छोटे बच्चे थे जिन्हें मैंने पहले भी देखा था। मैंने पूछा, 'यह क्या है, ये कौन हैं?' जो दो आदमी मुझे ले जा रहे थे, उन्होंने कहा, 'पहले दूसरी जगह चलते हैं!' हम निकल पड़े और अपना सफ़र तब तक जारी रखा जब तक हम एक बड़े बगीचे में नहीं पहुँच गए, जो उससे भी बड़ा और सुंदर था जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था। उन्होंने कहा, 'ऊपर जाओ!' हम ऊपर गए, और हम सोने और चाँदी की ईंटों से बने एक शहर में पहुँचे, और हम शहर के गेट पर पहुँचे। हमने उसे खोलने के लिए कहा, और हमारे लिए गेट खोल दिया गया। हम अंदर गए और कुछ आदमियों ने हमारा स्वागत किया जिनके शरीर आधे सबसे सुंदर आदमियों जैसे थे जिन्हें आपने कभी देखा होगा, और आधे सबसे बदसूरत आदमियों जैसे थे जिन्हें आपने कभी देखा होगा। उन्होंने उनसे कहा, 'तुम सब जाओ!' फिर वे एक नदी के पास पहुँचे। अचानक, नदी बह रही थी, उसका पानी बहुत सफ़ेद और साफ़ था, तो वे वहाँ जाकर नहाए, फिर हमारे पास लौटे, उनकी गंदगी उस नदी में बह गई थी जहाँ उन्होंने नहाया था, इसलिए वे सबसे हैंडसम बन गए। उन्होंने मुझसे कहा, 'यह अदन का स्वर्ग है और यहीं तुम्हारा घर है!' फिर मेरी नज़र ऊपर उठी, मुझे पता ही नहीं चला कि वहाँ एक सफ़ेद बादल जैसा महल अकेला था। वे दोनों बोले; 'यह तुम्हारा घर है!' मैंने जवाब दिया; 'अल्लाह तुम दोनों को आशीर्वाद दे, अब मुझे इसमें अंदर जाने दो!' उन दोनों ने जवाब दिया; 'अभी नहीं, लेकिन तुम ज़रूर इसमें अंदर जाओगे!' मैंने कहा; 'पिछली रात से मैंने अजीब और हैरान करने वाली घटनाएँ देखी हैं, प्लीज़ मुझे बताओ कि मैंने क्या देखा!' उन दोनों ने कहा; 'अब मैं तुम्हें उन घटनाओं के बारे में बताता हूँ! जहाँ तक पहले आदमी की बात है जिसके सिर पर पत्थर से वार किया गया था, वह एक ऐसा आदमी था जिसने कुरान की पढ़ाई की थी लेकिन उसने उसे मना कर दिया था, और वह तब तक सोता रहा जब तक उसकी फ़र्ज़ नमाज़ छूट नहीं गई। जहाँ तक उस आदमी की बात है जिसके पास तुम आए जिसने अपने दोस्त की ठोड़ी को उसकी गर्दन के पिछले हिस्से तक, उसके गले को ठोड़ी तक, और उसकी आँखों को उसकी गर्दन के पिछले हिस्से तक चीर दिया था, वह एक ऐसा आदमी था जिसने अपना घर छोड़ दिया और झूठ बोला, और उसके झूठ ने आसमान को छू लिया। जहाँ तक उस आदमी और औरत की बात है जो भट्टी जैसी इमारत में नंगे थे, वे ऐसे आदमी और औरतें थे जिन्होंने बदचलनी की थी। जो आदमी नदी में तैर रहा था और बड़े-बड़े पत्थरों से खाया जा रहा था, वे सूदखोर हैं, जो आदमी जहन्नम में आग जलाकर उसके चारों ओर दौड़ते हुए डरावना चेहरा दिखाता है, वह मालिक है, जहन्नम का रखवाला, जो लंबा आदमी बगीचे में है, वह इब्राहिम अलैहिस्सलाम है, और उसके आस-पास बच्चे हैं जो फितरा में मर गए। तब कुछ साथियों ने पूछा: 'अल्लाह के रसूल, मुशरिकों की औलाद भी?' अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मुशरिकों की औलाद भी! जो लोग आधे सुंदर और आधे बदसूरत हैं, वे वे हैं जो अच्छे कामों को दूसरों की बदसूरती के साथ मिलाते हैं, फिर अल्लाह उनकी गलतियों को माफ कर देता है।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 11937, 13202
इमाम बुखारी : 6525