हदीस
Melakukan amalan penghuni surga tetapi ia termasuk penghuni neraka
Imam Ibnu Majah : 2695حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْأَزْهَرِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ بْنُ هَمَّامٍ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ أَشْعَثَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الرَّجُلَ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْخَيْرِ سَبْعِينَ سَنَةً فَإِذَا أَوْصَى حَافَ فِي وَصِيَّتِهِ فَيُخْتَمُ لَهُ بِشَرِّ عَمَلِهِ فَيَدْخُلُ النَّارَ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الشَّرِّ سَبْعِينَ سَنَةً فَيَعْدِلُ فِي وَصِيَّتِهِ فَيُخْتَمُ لَهُ بِخَيْرِ عَمَلِهِ فَيَدْخُلُ الْجَنَّةَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَاقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ{ تِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ إِلَى قَوْلِهِ عَذَابٌ مُهِينٌ }
हमनी के बतवले बा [अहमद बिन अजहर], हमनी के बतवले बा [अब्दुर्राजाक बिन हम्माम], हमनी के [मा'मर] से [`अश'अथ बिन अब्दुल्लाह] से [स्याहर बिन हौस्याब] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े, उ कहले; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में आदमी सत्तर साल तक अहलुल खैर - अच्छा काम - के संगे नीमन काम करेला, फिर जदी उ वसीयत करेला अवुरी उ अपना मर्जी में अन्याय करेला त उ अपना बुरा काम के संगे खतम हो जाला ताकि उ नरक में चल जाला। आ साँचहू आदमी सत्तर साल ले दुष्टन के काम से नीमन काम करेला, तब ऊ अपना मर्जी में न्यायसंगत काम करेला, एहसे ऊ नीमन काम से खतम हो जाला जेहसे कि ऊ स्वर्ग में प्रवेश कर लेव'. अबू हुरैराह कहले कि; अगर रउवा चाहत बानी त पढ़ीं: 'अल्लाह के इहे रिज़िज़ ह जब तक कि उनकर बात घृणित सजा ना हो जाव'। एक निसा : 13-14 के बा।