प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1677
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ سُمَيٍّ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ السَّفَرُ قِطْعَةٌ مِنْ الْعَذَابِ يَمْنَعُ أَحَدَكُمْ طَعَامَهُ وَشَرَابَهُ وَنَوْمَهُ فَإِذَا قَضَى نَهْمَتَهُ فَلْيُعَجِّلْ إِلَى أَهْلِهِ
हमें बताया गया है ['अब्दुल्ला बिन मसलमा] ने हमें [मलिक] ने [सुमय्या] से [अबू शालीह] से [अबू हुरैरा रदियल्लाहु अन्हु] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यात्रा (सफ़र) यातना का हिस्सा है, जो तुमसे किसी को खाने, पीने और सोने से रोकता है। इसलिए जब वह अपना काम खत्म कर ले, तो उसे तुरंत अपने परिवार के पास लौट जाना चाहिए।"