प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 4351
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَنْبَارِيُّ حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَ حَدَّثَنَا أَصْحَابُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّهُمْ كَانُوا يَسِيرُونَ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَامَ رَجُلٌ مِنْهُمْ فَانْطَلَقَ بَعْضُهُمْ إِلَى حَبْلٍ مَعَهُ فَأَخَذَهُ فَفَزِعَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يُرَوِّعَ مُسْلِمًا
[मुहम्मद बिन सुलेमान अल अंबारी] ने हमें बताया है, [इब्न नुमैर] ने हमें [अल अमाश] से [अब्दुल्ला बिन यासर] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से बताया है उन्होंने कहा, "[मुहम्मद के साथी] सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे बताया कि जब वे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ चल रहे थे, उनमें से एक सो गया। फिर कुछ साथियों ने उसके साथ वाली रस्सी ली और तब तक खींची जब तक कि सो रहा व्यक्ति चौंक नहीं गया। तब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक मुसलमान के लिए अपने साथी मुसलमान भाई को चौंकाना जायज़ नहीं है।"