प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 2098
حَدَّثَنَا الْمَكِّيُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ مَيْسَرَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ الشَّرِيدِ قَالَ وَقَفْتُ عَلَى سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ فَجَاءَ الْمِسْوَرُ بْنُ مَخْرَمَةَ فَوَضَعَ يَدَهُ عَلَى إِحْدَى مَنْكِبَيَّ إِذْ جَاءَ أَبُو رَافِعٍ مَوْلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَفَقَالَ يَا سَعْدُ ابْتَعْ مِنِّي بَيْتَيَّ فِي دَارِكَ فَقَالَ سَعْدٌ وَاللَّهِ مَا أَبْتَاعُهُمَا فَقَالَ الْمِسْوَرُ وَاللَّهِ لَتَبْتَاعَنَّهُمَا فَقَالَ سَعْدٌ وَاللَّهِ لَا أَزِيدُكَ عَلَى أَرْبَعَةِ آلَافٍ مُنَجَّمَةً أَوْ مُقَطَّعَةً قَالَ أَبُو رَافِعٍ لَقَدْ أُعْطِيتُ بِهَا خَمْسَ مِائَةِ دِينَارٍ وَلَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْجَارُ أَحَقُّ بِسَقَبِهِ مَا أَعْطَيْتُكَهَا بِأَرْبَعَةِ آلَافٍ وَأَنَا أُعْطَى بِهَا خَمْسَ مِائَةِ دِينَارٍ فَأَعْطَاهَا إِيَّاهُ
हमें बताया है [अल मक्की बिन इब्राहिम] ने हमें बताया है [इब्न जुराइज] ने मुझे बताया है [इब्राहिम बिन मैसरा] ['अमरू बिन असी-स्यारिद] से कहा; मैं एक बार साद बिन अबी वकाश के साथ बैठा था फिर अल मिस्वर बिन मखराम आए फिर उन्होंने अपना हाथ मेरे एक कंधे पर रखा फिर [अबू रफी] पैगंबर के मौला सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए और कहा: "ऐ साद, अपने गांव में मेरे दो घर खरीद लो!" साद ने कहा: "अल्लाह की कसम, मैं इसे नहीं खरीदूंगा।" फिर अल मिस्वर ने कहा: "अल्लाह की कसम, मैं इसे खरीदूंगा।" तो साद ने कहा: "अल्लाह की कसम, मैं चार हज़ार से ज़्यादा टुकड़े नहीं खरीदूंगा।" अबू रफी ने कहा: "अगर मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते नहीं सुना होता कि "पड़ोसी नज़दीकी के मामले में बेहतर होते हैं, तो मैं उसे चार हज़ार सिक्कों में भी घर नहीं देता, जबकि इस बार मुझे सिर्फ़ पाँच सौ दीनार मिले।" फिर उन्होंने उसे अपना घर दे दिया।
समर्थक हदीस :
इमाम अहमद : 879, 13735, 13883, 14469, 14751, 18642, 18643, 18650, 18658, 19323, 19377, 22751, 25927
इमाम बुखारी : 2098, 6462, 6463, 6465, 6466
इमाम मुस्लिम : 3017, 3018
इमाम अबू दाऊद : 3048, 3051
इमाम तिर्मिदज़ी : 1290
इमाम नसाई : 4567, 4622, 4623, 4624, 4626
इमाम इब्नु माजा : 2485, 2486, 2487, 2489
इमाम दरिमी : 2513, 2514